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West Bengal News: 2500 कमाने वाली घरेलू सहायिका अब विधानसभा में! BJP की कलिता माझी ने रचा इतिहास

कालिता मांझी… पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच ये नाम काफी सुर्खियों में है. ऐसा इसलिए है क्योंकि कालिता चुनाव में जीतकर विधायक बन गई है, अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें क्या खास बात है. कई लोगों ने जीत दर्ज की है और वो विधायक बने हैं फिर कलिता में ऐसी क्या खास बात है. तो चलिए आपको बताते हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एक बेहद प्रेरक कहानी सामने आई है. राज्य में बीजेपी की प्रचंड लहर के बीच एक ऐसी जीत हुई है जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. इस चुनाव में कालिता मांझी नाम की एक महिला ने जीत हासिल की है, जिनके नाम सुर्खियों में छाया हुआ है. कालिता दूसरों के घरों में बर्तन मांजने और साफ-सफाई का काम करती थीं, लेकिन अब विधायक चुन ली गई हैं.

जिनके हौसले बुलंद होते हैं, उनकी जीत निश्चित होती है

कठिनाइयां भी हार जाती हैं, मेहनत जिनकी मजबूत होती है

लोगों के घरों में करती हैं काम

आउसग्राम सीट से कालिता मांझी, जो महज 2,500 महीना कमाने वाली घरेलू कामगार थीं, अब विधायक बन गई हैं. गुस्कारा नगर पालिका की रहने वाली मांझी चार घरों में काम करती थीं, लेकिन उनकी जमीनी पकड़ और जनता से जुड़ाव ने उन्हें राजनीति में खास पहचान दिलाई.

मांझी ने श्यामा प्रसन्ना लोहार को दी शिकस्त

कालिता मांझी की जीत बीजेपी के लिए एक व्यापक जनादेश के साथ आई है, जिसने राज्य में सत्ता हासिल की है. मांझी ने 1,07,692 वोट हासिल कर अपने प्रतिद्वंदी श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया. उनकी जीत ने राज्य में व्यापक राजनीतिक बदलाव के बीच जमीनी स्तर के उम्मीदवारों को बढ़ावा देने के बीजेपी के प्रयासों को रेखांकित किया है.

2021 में कलिता को मिली थी हार

उनकी उम्मीदवारी पहले ही चर्चा में थी क्योंकि वह बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं. यह जीत सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए उम्मीद की नई किरण मानी जा रही है. मांझी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के अभेदानंद थंडर से 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि, पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई.

जीत के बाद भी सादगी बरकरार

घरेलू कामगार से विधायक बनीं बीजेपी की कलिता मांझी ने अपनी जीत के बाद भी सादगी नहीं छोड़ी. सोमवार देर रात जीत का प्रमाण पत्र मिलने के बाद जब वह घर लौटीं, तो उनका स्वागत किसी भव्य जश्न या दावत के साथ से नहीं हुआ. उन्होंने बताया ‘मुझे रात 10:30 बजे के बाद अपना जीत का प्रमाण पत्र मिला. मैंने मुश्किल से कुछ खाया था और दिनभर के तनाव के बाद मुझे बहुत भूख लगी थी. मैंने अपनी सास के हाथ का बना ‘आलू-पोटोलर झोल’ खाया’ ,

चुनाव के बाद फिर घर के कामों में जुटीं

मंगलवार (5 मई) को विधायक बनने के अगले ही दिन, मांझी ने कपड़े धोने और अन्य घरेलू कामों में खुद को व्यस्त रखा. कई हफ्तों से चुनाव प्रचार में व्यस्त रहने के बाद उन्होंने सामान्य दिनचर्या अपनाई. एक धार्मिक हिंदू होने के कारण वह हर मंगलवार व्रत रखती हैं, इसलिए उन्होंने उस दिन कुछ भी नहीं खाया.

संघर्ष भरी जिंदगी से राजनीति तक का सफर

कलिता मांझी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. साल 2006 में उनकी शादी एक प्लंबर से हुई थी. परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण रही है. शादी के बाद वह गुस्कारा (Guskara) इलाके में घरेलू कामगार के रूप में काम करती रहीं. दो घरों में काम कर वह हर महीने करीब 4,500 रुपये कमाती थीं. इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भागीदारी जारी रखी.

पीएम के भाषणों से मिली प्रेरणा

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा. घरेलू सहायिका का काम करने के बावजूद वो अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए बीजेपी के सभी कार्यक्रमों में भाग लेती थीं. उन्होंने बताया कि दो घरों में काम करने के साथ-साथ पार्टी के काम को संतुलित करना मुश्किल था. जहां उनकी मासिक आय 4,500 रुपए थी.

जीत पर क्या बोलीं मांझी

कलिता मांझी ने कहा कि वो जीत से बहुत खुश हैं और अपने जैसे गरीब लोगों के लिए काम करना चाहती हैं. उन्होंने कहा ‘मैं इतनी उत्साहित हूं कि पिछले कुछ दिनों से ठीक से सोए बिना भी मुझे थकान महसूस नहीं हो रही है’ मांझी ने कहा ‘मुझे विश्वास है कि बीजेपी महिलाओं और गरीबों का उत्थान कर सकती है और सभी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है’.

शपथ ग्रहण समारोह में ले जानेकी योजना

उन्होंने आगे कहा कि वह अपने पति और बेटे को कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह में ले जाने की योजना बना रही हैं, लेकिन उनके पास इस अवसर के लिए उपयुक्त कोई सुंदर साड़ी नहीं है. उन्होंने कहा ‘मैं अपनी आर्थिक स्थिति और अपने परिवार की आय और सामाजिक स्थिति से भली भांति परिचित हूं’.

मालिक ने साड़ी देने का किया फैसला

मांझी की इस सादगी को देखते हुए उनके मालिक कृष्णा पात्रा ने उन्हें साड़ी उपहार में देने का फैसला किया है. कृष्णा पात्रा, जिनके घर माझी पिछले 20 सालों से काम कर रही हैं, उनकी जीत से बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि माझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनकी सफलता पर उन्हें गर्व है.

बीजेपी ने दर्ज की शानदार जीत

इस चुनाव में बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया. यह जीत राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है. यह परिणाम इसलिए भी खास है क्योंकि 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में वही पार्टी सरकार बनाने जा रही है जो केंद्र में सत्ता में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में कमल खिल गया है.

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