झारखंड में SIR प्रपत्र भरने की आज आखिरी तारीख! 5 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट; बाहरी मजदूरों का पलायन शुरू

रांची (झारखंड): झारखंड में वर्तमान में चल रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरने और जमा करने की आज अंतिम तिथि है।
समय पर गणना प्रपत्र भरकर जमा करने वाले सभी वैध मतदाताओं के नाम आगामी 5 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Voter List) में शामिल किए जाएंगे। इन सबके बीच, झारखंड में लागू की गई एसआईआर प्रक्रिया का सीधा और व्यापक प्रभाव राज्य में कार्यरत प्रवासी मजदूरों की आवाजाही पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश और नेपाल से बड़ी संख्या में मजदूर यहां कंस्ट्रक्शन (भवन निर्माण) के क्षेत्र में काम करने आते रहे हैं। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल सहित देश के अन्य राज्यों के प्रवासी कामगार भी रोजगार की तलाश में यहां पहुंचते थे। हालांकि, एसआईआर की शुरुआत होने के बाद से ऐसे बाहरी और गैर-दस्तावेजी मजदूरों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है।
💼 “SIR सरकार का ऐतिहासिक कदम, स्थानीय मजदूरों को मिलेंगे रोजगार के अवसर”: चैंबर ऑफ कॉमर्स
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने इस संबंध में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एसआईआर सरकार की एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल है, जो देश और प्रदेश के वास्तविक नागरिकों की पहचान सुनिश्चित करती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मजदूर देश के अन्य राज्यों से यहां काम करने आ रहे हैं, उन्हें अपने गृह राज्य में ही एसआईआर प्रक्रिया पूरी करानी होगी। इसके साथ ही, अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान भी एसआईआर के जरिए ही संभव हो पा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि बाहर के मजदूरों के पलायन से स्थानीय मजदूरों के लिए रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। यह झारखंड के स्थानीय कुशल श्रमिकों के लिए बेहतरीन अवसर है कि उन्हें अपने ही राज्य में काम मिलेगा, क्योंकि स्थानीय कामगार भी गुणवत्ता के मामले में बाहरी मजदूरों से बेहतर काम कर सकते हैं।
🏗️ कंस्ट्रक्शन सेक्टर में थोड़े समय की दिक्कत, लेकिन राष्ट्रहित में जरूरी: आदित्य मल्होत्रा
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने एसआईआर प्रक्रिया का पूर्ण समर्थन करते हुए स्वीकार किया कि वर्तमान में कंस्ट्रक्शन (निर्माण) क्षेत्र में श्रमिकों की अस्थाई कमी के कारण थोड़ी समस्याएं आ रही हैं, लेकिन यह स्थिति बेहद कम समय के लिए है।
एक सवाल का उत्तर देते हुए आदित्य मल्होत्रा ने बताया कि बाहरी मजदूरों के अचानक लौटने के पीछे का मुख्य कारण उनके मन में व्याप्त डर और असुरक्षा की भावना है। जब किसी दूसरे देश के गैर-कानूनी नागरिक किसी क्षेत्र में काम करते हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का भय बना रहता है। ऐसे में हर सरकार की प्राथमिकता अपने मूल नागरिकों को सुरक्षा और बेहतर अवसर प्रदान करना होना चाहिए।
📊 चुनाव आयोग के बड़े आंकड़े: 1.12 लाख से अधिक लोगों ने फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से किया इनकार
मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 1,12,642 से अधिक लोगों ने इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया है।
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत 28 जुलाई तक कुल 2,20,20,994 मतदाताओं ने सफलतापूर्वक फॉर्म भरकर और हस्ताक्षर करके जमा कर दिया है। इन सभी प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन कार्य पूरा हो चुका है और इनके नाम 5 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट सूची में शामिल रहेंगे।
इस पूरी प्रक्रिया में एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आया है कि 43,55,463 मतदाताओं ने अब तक अपने इन्यूमरेशन फॉर्म वापस जमा ही नहीं किए हैं। इसके अलावा, राज्य भर में कुल मृत मतदाताओं की संख्या 7,61,755 (2.88%) पाई गई है, जबकि अनुपस्थित या जिनका पता नहीं चल सका (Unreachable) ऐसे मतदाताओं की संख्या 14,59,029 (5.51%) दर्ज की गई है।
आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि प्रक्रिया के दौरान स्थाई रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं की संख्या 15,87,496 (6%) है, जबकि अन्य स्थानों या राज्यों की मतदाता सूची में पहले से नामांकित पाए गए लोगों की संख्या 4,34,541 (1.64%) रिकॉर्ड की गई है।






