झारखंड में खुलेंगे ‘प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया’! रांची, जमशेदपुर और देवघर से शुरुआत; सरकार देगी 1 करोड़ की वित्तीय मदद

रांची (झारखंड): कोरोना महामारी की वैश्विक विभीषिका के बाद से ही दुनिया भर के लोग अपनी सेहत और खान-पान के प्रति अत्यधिक जागरूक हुए हैं।
भारत में भी जिस अनाज को कभी ‘मोटा अनाज’ कहकर संभ्रांत समाज द्वारा उपेक्षित किया जाता था, वही अनाज आज मिलेट, सुपर फूड और ‘श्रीअन्न’ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। अब आम जनमानस से लेकर खास वर्ग तक स्वास्थ्य लाभ के लिए इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं।
💰 कैफेटेरिया के लिए पहले साल 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय मदद देगी सरकार, जल्द जारी होगा EOI
इसी कड़ी में झारखंड सरकार का कृषि विभाग राज्यवासियों के स्वास्थ्य और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक अभिनव पहल करने जा रहा है।
राज्य के तीन प्रमुख शहरों—रांची, जमशेदपुर और देवघर में ‘प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया’ शुरू किए जाएंगे। इन सेंटर्स पर मोटे अनाज से तैयार हर व्यंजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होगा। झारखंड के कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि प्रत्येक प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया को पहले वर्ष में सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके संचालन हेतु विभाग जल्द ही ईओआई (Expression of Interest) जारी करेगा।
इसके बाद राज्य के अन्य जिलों में भी छोटे मिलेट्स आउटलेट्स खोले जाएंगे, जिसके लिए प्रति आउटलेट 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया कि यह सहायता केवल प्रथम वर्ष के लिए होगी, जिसके बाद परफॉर्मेंस-बेस्ड इवैल्यूएशन कर आगे का फैसला लिया जाएगा।
🍲 पिज्जा, डोसा, धुस्का से लेकर मिठाइयां तक… मिलेट्स से बनेंगे लजीज व्यंजन
कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा ने बताया कि इसी वर्ष से इन तीनों प्रमुख शहरों में प्रीमियम मिलेट्स कैफेटेरिया का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह एक बड़े और प्रीमियम रेस्टोरेंट जैसा होगा, जहां स्नैक्स, इडली, डोसा, पारंपरिक धुस्का, पिज्जा, विविध प्रकार की रोटियां, हलवा और मिठाइयां सीधे श्रीअन्न से तैयार की जाएंगी। यह पहल उन सभी लोगों को खूब आकर्षित करेगी जो रिफाइंड आटा, मैदा, चावल व चीनी से परहेज कर सेहतमंद विकल्प तलाश रहे हैं।
🌾 मिलेट्स उत्पादन में झारखंड को नंबर-1 बनाने का लक्ष्य, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार
कृषि विभाग की सोच झारखंड को मिलेट्स (श्रीअन्न) उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाने की है।
विभाग का मानना है कि जब लोग मिलेट्स से बने व्यंजनों का स्वाद चखेंगे और इसके फायदों को समझेंगे, तो बाजार में मोटे अनाज की मांग स्वतः बढ़ेगी। इससे राज्य के अन्नदाता किसानों को उनके मड़ुआ व अन्य अनाजों का उचित और बेहतर मूल्य मिल सकेगा, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगे।
🌍 क्लाइमेट चेंज और सुखाड़ से निपटने में संजीवनी बनेगी मोटे अनाज की खेती
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Global Climate Change) के दुष्परिणामों से निपटने में श्रीअन्न की खेती बेहद कारगर है।
कम बारिश या सुखाड़ की स्थिति में भी आसानी से उगने वाले ये अनाज भविष्य की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ साबित होंगे। इसी महत्व को देखते हुए वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष’ के रूप में मनाया गया था। झारखंड सरकार भी राज्य में धान के विकल्प के तौर पर मिलेट्स को तेजी से बढ़ावा दे रही है।
💵 मड़ुआ की खेती पर प्रति एकड़ 3000 रुपये प्रोत्साहन राशि, बीजों पर 50% सब्सिडी
मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए झारखंड सरकार मड़ुआ उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये (अधिकतम 5 एकड़ पर 15,000 रुपये) की वित्तीय सहायता दे रही है।
इसके साथ ही बीजों पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मड़ुआ की सरकारी खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने का भी ऐलान किया है।
📊 22 हजार किसानों का हुआ रजिस्ट्रेशन, 1 लाख हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य
वर्तमान में झारखंड के गुमला, साहिबगंज और रांची जिले मड़ुआ उत्पादन में शीर्ष पर हैं।
कृषि निदेशक ने बताया कि मिलेट्स मिशन के तहत 7 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक राज्यभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। राज्य में अब तक 22 हजार किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है और इस सीजन में 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर मिलेट्स की खेती का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
🩺 “पोषण सुरक्षा और दिल की सेहत का सुरक्षा कवच है मड़ुआ”: डॉ. हिमालय झा
रांची सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. हिमालय झा ने सरकार की इस योजना का स्वागत किया है।
उन्होंने बताया कि मड़ुआ एक ‘सुपर फूड’ है, जिसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फास्फोरस और फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। साथ ही ग्लूटेन-फ्री और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह मोटापे, कुपोषण और हृदय रोगों (Cardio-metabolic disorders) को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। सरकार का यह प्रयास पारंपरिक थाली को समृद्ध बनाने के साथ राज्य में न्यूट्रिशन सिक्योरिटी सुनिश्चित करेगा।






