Eco-Friendly Puja Jharkhand: मूर्तिकार से लेकर विसर्जन तक प्रदूषण बोर्ड ने जारी किए नियम, सिंगल यूज प्लास्टिक पूरी तरह बैन

त्योहारों के इस सीजन में पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने पूजा समितियों, स्थानीय निकायों, जिला प्रशासन और आम जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नई गाइडलाइन के तहत मूर्ति निर्माण, पंडालों में कचरा प्रबंधन, पूजा सामग्री के रख-रखाव, प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक और मूर्ति विसर्जन को लेकर कई अहम प्रावधान तय किए गए हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव राजीव लोचन बख्शी ने स्पष्ट किया है कि आगामी पूजा आयोजनों के दौरान इन सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना राज्य के हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
🌍 मूर्तियों में प्राकृतिक मिट्टी को प्राथमिकता: POP, थर्मोकोल और रेजिन फाइबर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक
पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी पूजा समितियों से अपील की गई है कि वे केवल ऐसी प्रतिमाओं को प्राथमिकता दें जो पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की गई हों। मूर्तियों के निर्माण में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), थर्मोकोल और रेजिन फाइबर जैसी खतरनाक सामग्रियों के इस्तेमाल से बचने की कड़ी सलाह दी गई है। प्रतिमाओं में ऐसी सामग्री का उपयोग करने को कहा गया है जो पानी में आसानी से घुलनशील हो और गैर-विषैली (Non-toxic) हो। इसके अलावा, सजावट और रंगों के मामले में भी प्राकृतिक विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिसमें हल्दी और चंदन जैसे जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) प्राकृतिक रंगों का उपयोग सबसे उपयुक्त बताया गया है।
🗑️ हर पूजा पंडाल में अनिवार्य होगी ‘थ्री-बिन सिस्टम’ की व्यवस्था, कचरे का होगा सही निपटारा
त्योहार के दौरान निकलने वाले कचरे को सही तरीके से अलग-अलग रखने के लिए सभी पूजा पंडालों में तीन अलग-अलग डिब्बों (Three-Bin System) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से जैविक कचरा, गैर-जैविक कचरा और अन्य पूजा अवशेषों को आसानी से अलग किया जा सकेगा और उनका उचित निपटारा किया जा सकेगा। इसके साथ ही, प्रतिमा विसर्जन से ठीक पहले उसमें लगे फूल, कपड़े और अन्य सजावटी सामानों को पूरी तरह से हटाने की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित पूजा समितियों की होगी। इन सभी सामग्रियों को अलग-अलग करके निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर रखना होगा।
🚫 सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध, पत्तल और मिट्टी के बर्तनों के इस्तेमाल पर रहेगा विशेष जोर
पूजा आयोजनों और भंडारों के दौरान डिस्पोजेबल प्लास्टिक के उपयोग से बचने की सख्त सलाह दी गई है। इसकी जगह पर पत्तल, पेड़ों के पत्तों से बनी प्लेट, बायोडिग्रेडेबल पेपर कप-प्लेट और पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों के इस्तेमाल को जमकर प्रोत्साहित किया गया है। पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए पर्षद ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने पर जोर दिया है ताकि जलस्रोतों और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
🧑🎨 पंजीकृत और अधिकृत कारीगरों से ही खरीदें प्रतिमाएं, प्रशासन तय करेगा मूर्तियों की ऊंचाई
जारी गाइडलाइन के मुताबिक, सभी पूजा समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल स्थानीय निकायों में पंजीकृत या अधिकृत मूर्तिकारों और कारीगरों से ही पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं खरीदें। समितियों को विसर्जन और कचरा प्रबंधन से जुड़ी सभी अनुमतियां स्थानीय निकाय से पूरी करनी होंगी। इसके अलावा, जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं मूर्ति निर्माताओं को अनुमति दें जो प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करते हैं। जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों की ऊंचाई को नियंत्रित करने के पुख्ता इंतजाम भी किए जा सकते हैं।
🌊 विसर्जन स्थल पर कचरा फेंकना और जलाना प्रतिबंधित, 24 घंटे के भीतर हटानी होगी अवशेष सामग्री
प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विसर्जन स्थलों पर पूजा के बाद बचे हुए फूल, वस्त्र और सजावटी सामानों को फेंकना या जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। मूर्ति विसर्जन के तुरंत बाद विसर्जन स्थल पर बची हुई सभी प्रकार की सामग्रियों को स्थानीय निकायों द्वारा 24 घंटे के भीतर वहां से हटाकर सुरक्षित और उचित तरीके से निपटाने की व्यवस्था करनी होगी।
🏡 घरों में विसर्जन करने वाले लोग भी बरतें पूरी सावधानी, पॉलीथिन में पूजा सामग्री डालने पर रोक
यह गाइडलाइन केवल बड़े पूजा पंडालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि घरों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए भी पर्यावरण-अनुकूल तरीके अपनाने की अपील की गई है। नागरिक अपने घर पर ही विसर्जन कर सकते हैं या फिर स्थानीय निकायों द्वारा बनाए गए विशेष कृत्रिम तालाबों और वाटर टैंक का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, लोगों को यह भी हिदायत दी गई है कि वे पूजा की बची हुई सामग्री को पॉलीथिन या प्लास्टिक की थैलियों में बांधकर नदियों या अन्य जलस्रोतों में बिल्कुल न डालें।
📢 श्रद्धालुओं के बीच जागरूकता फैलाने के लिए लगेंगे पोस्टर और पर्चे, आस्था के साथ पर्यावरण सुरक्षा का संदेश
त्योहार के दौरान आम जनता और श्रद्धालुओं के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता फैलाने के लिए पूजा समितियों को पंडालों के पास पोस्टर और पर्चे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की मुख्य कोशिश यही है कि इस पावन त्योहार के दौरान लोगों की अटूट आस्था और उल्लास के साथ-साथ हमारे प्राकृतिक जलस्रोतों और आसपास के पर्यावरण को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।





