‘मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश’, धर्मवार आंकड़े मांगने पर भड़के ओवैसी

केंद्र सरकार द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज (High Level Committee on Demographic Changes) को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
ओवैसी ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी संसद और सार्वजनिक मंचों पर मुसलमानों की शैक्षिक (तालीमी), सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधिकारिक आंकड़े एकत्र करने की मांग करती थी, तब सरकार इस मांग को लगातार टालती रही।
उन्होंने दावा किया कि अब वही केंद्र सरकार डेमोग्राफी कमेटी के माध्यम से राज्यों से धर्म के आधार पर निजी और संवेदनशील विवरण मांग रही है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में ओवैसी ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज यह जानकारी जुटाने में क्यों लगी है कि किस धर्म के नागरिकों ने कितनी गाड़ियां खरीदीं और किसके पास कितनी अचल संपत्ति या जमीन है। उनका आरोप है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य जनकल्याणकारी नीतियां बनाना नहीं, बल्कि आंकड़ों को तोड़-मरोड़कर मुसलमानों के खिलाफ पेश करना और उनके नागरिक अधिकारों को प्रभावित करना है।
📊 15 सालों का धर्मवार डेटा मांगने का दावा: वाहन, जमीन और जन्म पंजीकरण का मांगा ब्योरा
‘द हिंदू’ की मीडिया रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख बिंदु:
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विभिन्न क्षेत्रों का ब्योरा: अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार की कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज ने राज्यों से बीते 15 वर्षों के दौरान हुए जन्म पंजीकरण, वाहनों की खरीद-फरोख्त, स्कूलों में छात्रों के दाखिले और जमीन-जायदाद के लेनदेन से जुड़ा धर्मवार डेटा उपलब्ध कराने को कहा है।
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पहचान पत्रों में वृद्धि की पड़ताल: इसके साथ ही जिलावार धार्मिक स्थलों की संख्या, आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड के पंजीकरण में दर्ज की गई असामान्य वृद्धि से संबंधित विशेष जानकारी भी राज्यों से मांगी गई है।
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आदिवासी क्षेत्रों और डिटेंशन सेंटर पर नजर: रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कमेटी ने राज्यों के आदिवासी बहुल इलाकों में कथित धार्मिक रूपांतरण से जुड़ी खुफिया रिपोर्ट, विभिन्न आयोगों के निष्कर्ष तथा देश में वर्तमान में संचालित डिटेंशन सेंटरों की अद्यतन स्थिति का ब्योरा भी तलब किया है।
🎯 मुसलमानों के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने का आरोप: ओवैसी बोले- विकास के आंकड़ों से क्यों बचती रही सरकार?
ओवैसी द्वारा उठाए गए विधिक व राजनीतिक सवाल:
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भेदभावपूर्ण रवैये का आरोप: सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब सच्चर कमेटी या अन्य मंचों के हवाले से अल्पसंख्यकों के पिछड़ेपन, रोजगार और साक्षरता दर पर आधिकारिक आंकड़े जुटाने की पैरवी की जाती है, तब सरकार कोई तत्परता नहीं दिखाती।
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पूर्वाग्रह से ग्रसित कवायद: उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के आधार पर लोगों की निजी संपत्तियों और वाहनों की गिनती करने का एकमात्र उद्देश्य एक खास समुदाय को कटघरे में खड़ा करना और राजनीतिक लाभ के लिए नकारात्मक विमर्श तैयार करना है।
🏛️ विपक्ष भी हुआ लामबंद: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी कमेटी के एजेंडे पर उठाए थे सवाल
डेमोग्राफी कमेटी की जांच पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया:
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कांग्रेस का कड़ा विरोध: ओवैसी से पूर्व कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने भी राज्यों से धर्म आधारित आंकड़े जुटाने की इस पूरी प्रक्रिया की कड़ी निंदा की थी।
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संविधान की मूल भावना के विपरीत: जयराम रमेश ने कहा था कि सरकारी स्तर पर धर्म के आधार पर नागरिकों के निजी डेटा को अलग-अलग करना पूरी तरह अनुचित, असंवैधानिक और पूर्वाग्रह से प्रेरित कदम है।
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पारदर्शिता की मांग: विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस कमेटी के गठन के वास्तविक उद्देश्यों और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर देश के सामने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करनी चाहिए।





