Bhiwani Manisha Death Case: शिक्षिका मनीषा संदिग्ध मौत मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला टला, अब 31 अक्टूबर को होगी सुनवाई

भिवानी: हरियाणा के भिवानी जिले की 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की रहस्यमय और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस बहुचर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की तरफ से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाले परिजनों के विरोध (प्रोटेक्ट) आवेदन पर बुधवार को आने वाला अदालत का फैसला टाल दिया गया है। सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई और निर्णय के लिए आगामी 31 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में मनीषा की मौत को माना था आत्महत्या, परिजनों ने रिपोर्ट को नकारा
इस बेहद संवेदनशील मामले की लंबी जांच-पड़ताल पूरी करने के बाद सीबीआई ने अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें मृतका मनीषा की मौत को किसी सुनियोजित हत्या के बजाय आत्महत्या करार दिया गया था। जांच एजेंसी के इस निष्कर्ष से पूरी तरह असंतुष्ट होकर मनीषा के पीड़ित परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और एक मजबूत प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की। इस याचिका के माध्यम से परिजनों ने सीबीआई की पूरी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की पुरजोर मांग की है।
15 अक्टूबर को हुई थी वकीलों के बीच लंबी बहस, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखने के बाद बढ़ाई तारीख
इससे पहले गत 15 अक्टूबर को विशेष अदालत के समक्ष मृतका के परिजनों के अधिकृत वकीलों और केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के बीच कई घंटों तक तीखी और लंबी कानूनी बहस चली थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब आगामी 31 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस तारीख पर पूरे इलाके की निगाहें टिकी हुई हैं कि अदालत सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को हरी झंडी देती है या फिर परिजनों की विरोध याचिका को स्वीकार करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी करती है।
क्या था पूरा मामला? जनदबाव के बाद जांच सौंपी गई थी केंद्रीय एजेंसी को
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भिवानी निवासी 19 वर्षीय युवा शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी, जिसके बाद से ही परिजनों और स्थानीय नागरिकों का यह लगातार कड़ा आरोप रहा है कि मनीषा की सामान्य मौत नहीं बल्कि उसकी हत्या की गई है। मामले की गंभीरता, बढ़ते सामाजिक दबाव और लोगों की मांग को देखते हुए इस सनसनीखेज प्रकरण की जांच का जिम्मा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपा गया था। अब आगामी 31 अक्टूबर को अदालत का जो भी रुख सामने आएगा, उससे यह तय होगा कि इस मामले में आगे कानूनी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी।





