Mutual Fund Direct Plan New Rules: म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव, 1 नवंबर 2026 से ऐप और वेबसाइट पर ‘डायरेक्ट प्लान’ बना डिफॉल्ट ऑप्शन

नई दिल्ली: यदि आप भी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में अपनी गाढ़ी कमाई निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण खबर आपके लिए बेहद काम की है। देश में म्यूचुअल फंड से जुड़े नियमों में एक बड़ा और अहम बदलाव आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की घोषणा के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से देश की सभी म्यूचुअल फंड कंपनियों के मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइटों पर ‘डायरेक्ट प्लान’ (Direct Plan) को डिफॉल्ट ऑप्शन बना दिया गया है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब जब भी कोई निवेशक निवेश करने के लिए कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म खोलेगा, तो स्क्रीन पर सबसे पहले उसे डायरेक्ट प्लान ही नजर आएगा। इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य निवेशकों को फंड के मैनेजमेंट खर्च और उनके निवेश से जुड़े फैसलों के बारे में अधिक पारदर्शिता और बेहतर जानकारी देना है।
रेगुलर प्लान चुनने से पहले मिलेगा विशेष अलर्ट, छोटे खर्च का अंतर लंबे समय में डालता है बड़ा असर
इस नई व्यवस्था के तहत यदि कोई निवेशक अपनी मर्जी से रेगुलर प्लान (Regular Plan) का चुनाव करता है, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म उसे आगे बढ़ने से पहले एक स्पष्ट अलर्ट जारी करेगा। निवेशक को बहुत ही साफ शब्दों में यह समझाया जाएगा कि रेगुलर प्लान में डायरेक्ट प्लान की तुलना में अधिक खर्च यानी ज्यादा एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) देना पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी (SIP) शुरू करने की प्लानिंग कर रहा है, तो सही और कम खर्च वाले प्लान का चुनाव उसे भविष्य में लाखों रुपये का अतिरिक्त फायदा दिला सकता है। दोनों प्लान के खर्च में दिखने वाला यह छोटा सा अंतर ही लंबे समय में आपके कुल रिटर्न पर बहुत बड़ा और गहरा असर डालता है।
9.47 लाख रुपये के बंपर एक्स्ट्रा फायदे का पूरा गणित, तीन स्कीमों के उदाहरण से समझें अंतर
खर्च के इस अंतर को पूरी तरह समझने के लिए हम म्यूचुअल फंड स्कीम के एक व्यावहारिक उदाहरण को देख सकते हैं, जहां दोनों योजनाओं का खर्च अलग-अलग होता है। मान लेते हैं कि कोई निवेशक हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी चलाता है और खर्च काटने से पहले इन स्कीमों में औसतन सालाना 12 फीसदी का रिटर्न प्राप्त होता है। ऐसे में दोनों योजनाओं के एक्सपेंस रेशियो का अंतर 10 या 20 साल के लंबे निवेश काल में साफ तौर पर उभर कर सामने आता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई निवेशक किसी प्रतिष्ठित लार्ज कैप फंड में 20 साल तक हर महीने 10,000 रुपये जमा करता है, तो उसकी जेब से कुल 24 लाख रुपये का निवेश होगा। अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक, डायरेक्ट प्लान चुनने पर यही राशि 20 साल बाद बढ़कर करीब 84.53 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि रेगुलर प्लान में यही रकम लगभग 75.06 लाख रुपये रहने की संभावना है। यानी केवल कम खर्च वाला डायरेक्ट प्लान चुनने मात्र से निवेशक को सीधे तौर पर करीब 9.47 लाख रुपये का अतिरिक्त फायदा मिल जाता है।
डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड प्लान के बीच का असली फर्क, फंड मैनेजर एक लेकिन खर्च में होता है बड़ा अंतर
किसी भी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले उसके अंदर होने वाले खर्चों पर पैनी नजर रखना बेहद जरूरी होता है। आपको बता दें कि डायरेक्ट या रेगुलर, दोनों ही प्रकार के म्यूचुअल फंड में आपका पैसा बिल्कुल एक ही जगह और उन्हीं शेयरों में निवेश किया जाता है। इतना ही नहीं, इन दोनों ही प्लान्स को एक ही फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है। इनके बीच का सबसे बड़ा और बुनियादी अंतर सिर्फ और सिर्फ खर्च का होता है। डायरेक्ट प्लान में किसी भी बिचौलिए, डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट को कमीशन नहीं देना पड़ता, जिसके कारण इस प्लान का कुल खर्च काफी कम होता है। इसके विपरीत, रेगुलर प्लान में एजेंटों और वितסकों को कमीशन चुकाया जाता है, जिससे उस फंड की लागत काफी बढ़ जाती है। यह सारा अतिरिक्त खर्च सीधे फंड के कुल एसेट से ही काटा जाता है, जिसका सीधा असर उसकी एनएवी (NAV) और अंततः आपके हाथ आने वाले फाइनल रिटर्न पर पड़ता है।
आपके लिए कौन सा प्लान चुनना रहेगा सबसे बेहतर? जानिए निवेशकों के लिए क्या हैं विकल्प
वे निवेशक जो खुद से बाजार की रिसर्च करने की क्षमता रखते हैं और अपने निवेश पर खुद पूरी नजर रख सकते हैं, उनके लिए डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान सबसे उत्तम और किफायती विकल्प है। वहीं, जिन निवेशकों को अपने निवेश से जुड़े फैसले लेने के लिए किसी वित्तीय सलाहकार या एजेंट की विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता होती है, वे अपनी सुविधा के अनुसार रेगुलर प्लान के साथ भी जा सकते हैं। इस नए नियम के आने के बाद से कोई भी रेगुलर प्लान पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। इसके अलावा, आपके पूर्व से चल रहे पुराने निवेश भी अपने आप स्वतः डायरेक्ट प्लान में ट्रांसफर नहीं होंगे। निवेशक अपनी सूझबूझ और सुविधा के मुताबिक इनमें से कोई भी विकल्प चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि केवल बेस एक्सपेंस रेशियो ही फंड का कुल खर्च नहीं होता, इसलिए अपनी एसआईपी शुरू करने से पहले सभी शुल्कों और खर्चों की तुलना आपस में जरूर कर लें।





