ब्रेकिंग
सनातनी विनोद कुमार बिंदल के सान्निध्य में रामलीला का समापन, दशहरा पर रावण दहन और श्रीराम के राज्याभि... US Stance on India Internal Matters: भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने से अमेरिका का इनकार, अमेरिकी... Delhi High Court Observation: 'आप लोग जेन-जी नहीं हैं...' कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ताओं पर कोर्ट ... Tiger Shroff Attack Case Update: टाइगर श्रॉफ पर हमले की साजिश का बड़ा खुलासा, लॉरेंस बिश्नोई गैंग के... Smriti Irani Attacks Rahul Gandhi: स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर तीखा हमला, महिला पुलिस अफसर के साथ... Mallikarjun Kharge Letter to PM Modi: परिसीमन और संविधान संशोधन को लेकर मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मो... UP Congress Press Conference: यूपी कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर बोला बड़ा हमला, एसआईआर प्रक्रिया में गड... Akhilesh Yadav Warning to Officers: राजनीतिक कार्यकर्ता बनकर काम करने वाले अधिकारियों को जेल जाने की... Supaul News: बिहार के सुपौल में 9 दिनों तक छाती पर कलश रखकर मां दुर्गा की आराधना करने वाली महिला की ... Haridwar Ganga Canal Cleaning News: हरिद्वार में हर की पैड़ी पर सूखी गंगा की धारा, मरम्मत और सफाई के...
देश

समय पर सामान्‍य मानसून, भई वाह! अब गांवों में तालाबों और पोखरों की खुदाई का काम भी शुरू

नई दिल्‍ली। मानसून समय पर है और सामान्य है। सोने पे सुहागा वाली मानसून की इस तस्वीर का देश और देश के लोगों के लिए खास महत्व है। कोविड-19 महामारी से जहां देश के तमाम क्षेत्रों की नकारात्मक या न्यूनतम वृद्धि दर रही है, वहीं कृषि और उससे जुड़े अन्य क्षेत्र इससे अछूते रहे हैं। जब देश की अर्थव्यवस्था के बढ़ने की दर 3.1 फीसद के न्यूनतम स्तर पर रही हो और कृषि क्षेत्र ने 5.9 फीसद की ऐतिहासिक वृद्धि दर हासिल की हो, तो सबकी उम्मीदें इसी पर टिक जाती हैं। जब दिग्गज कार निर्माता कंपनियां तमाम प्रयासों के बावजूद एक भी कार न बेच पाई हों और महिंद्रा एंड महिंद्रा व सोनालिका के ट्रैक्टरों की बिक्री क्रमश: दो और 19 फीसद बढ़ गई हो तो प्रतिकूल आर्थिक हालात में कृषि क्षेत्र पर भरोसा दोगुना बढ़ जाता है।

मानसून देगा सुकून

अब चूंकि मानसूनी बारिश भी अच्छी होने का अनुमान है। लिहाजा खेती-किसानी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बनती दिख रही है। तमाम अध्ययन में ये बात सामने आ चुकी है कि अच्छे मानसून के चलते ग्रामीण क्षेत्र की आय में इजाफा होता है। चूंकि देश की कुल मांग में 45 फीसद हिस्सेदारी ग्रामीण क्षेत्र से होती है, लिहाजा यह सामान्य मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए असामान्य रहने वाला साबित हो सकता है। मांग ढ़ेगी तो आपूर्ति के लिए उद्योगों का पहिया घूमने लगेगा।

उद्योग चलेंगे तो लोगों को रोजगार मिलेंगे और समग्र आय में इजाफा होगा। मांग और पूर्ति के संतुलित चक्र से बने देश के समग्र सकारात्मक रुझान से बाजार भी अठखेलियां करने लगता है। आर्थिक परिदृश्य पर कोरोना के प्रतिकूल असर से लोगों के व्यग्र और दुखी मन को मानसून सुकून देने वाला साबित हो सकता है। मानसून के इस तात्कालिक लाभ के अलावा दूरगामी प्रभाव का ज्यादा असर है। रबी के अलावा खरीफ की फसलों के लिए अमृत सरीखी इसकी बूंदें लाभ पहुंचाती हैं। ज्यादा बारिश से जमीन के अंदर गहराई में नमी रहती है जिसका असर गेहूं की बुआई के दौरान भी रहता है।

नदी, ताल, पोखर में जमा पानी रिस-रिसकर भूगर्भ जल को बढ़ाता है जिसका लाभ हमें साल भर मिलता है। जरूरत है बारिश को सहेजने की। इसे बहकर समुद्र में बेकार न जानें दे। आपातकाल में पारंपरिक पेशा और प्रकृति ही हमारी रक्षक बनती है। ऐसे में महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था से लेकर जल संकट का तारणहार बनने वाले इस मानसून की महिमा की पड़ताल आज हम सबके लिए बड़ा मुद्दा है।

Related Articles

Back to top button