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भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी इलाके में भी मजबूत की स्थिति, तीसरे दिन भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची वार्ता

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीनी घुसपैठ के प्रयासों पर आक्रामक जवाबी रणनीति अपना रही भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे की चोटी पर अपना कब्जा जमाने के बाद अब इसके उत्तरी इलाके में भी अपनी स्थिति मजबूत बना ली है। भारत की बदली रणनीति से बौखलाए चीन के किसी दुस्साहस को थामने के लिए सेना की स्पेशल फोर्स के सैनिकों को पैंगोंग त्सो लेक के उत्तरी इलाके में विशेष रूप से तैनात कर दिया गया है। स्पेशल फोर्स के सैनिकों ने एलएसी पर इस इलाके में चीनी सेना की किसी चालबाजी को रोकने की रणनीति के तहत अपनी पोजीशन मजबूत कर ली है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर आक्रामक मोर्चेबंदी से उपजे हालात के चलते लगातार तीसरे दिन हुई ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।

सूत्रों ने बताया कि चुशूल सेक्टर में छह घंटे से भी लंबी चली ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में भारतीय सेना ने बदली रणनीति के तहत एलएसी पर अपनी मौजूदा पोजीशन में बदलाव की चीनी मांग को ठुकरा दिया। पूर्वी लद्दाख में पिछले चार दिनों के अंदर भारतीय सेना ने अपनी सैन्य मोर्चेबंदी के सहारे कई इलाकों में रणनीतिक बढ़त बनाई है। पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिणी किनारे में चीनी सेना को हतप्रभ करते हुए भारतीय सैनिकों ने ब्लैक टॉप चोटी पर काबिज होते हुए मंगलवार को इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। साथ ही इस क्षेत्र की दो अन्य चोटियां भी भारतीय सैनिकों के नियंत्रण में आ चुकी हैं। सेना इस रणनीतिक बढ़त को चीन पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। ताकि चीनी सैनिक एलएसी के उन इलाकों से पीछे हटें जहां वे पिछले तीन-चार महीने से डटे हैं।

पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिणी इलाके में ऊंची चोटियों पर पहुंचे भारतीय सैनिकों को हटाने के लिये चीन ने मंगलवार को दोबारा कोशिश की, लेकिन अलर्ट सेना के जवानों के आगे चीनी सैनिकों को बैरंग लौटना पड़ा। चीनी सेना ने घुसपैठ का यह प्रयास तब किया, जब चुशुल में ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता चल ही रही थी। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने अपनी पोजीशन मजबूत करने के साथ ही पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे के इलाके में अतिरिक्त संख्या में सैनिकों की तैनाती भी कर दी है। साथ ही टैंक समेत दूसरे हथियारों और एंटी टैंक मिसाइल की संख्या भी वहां बढ़ा दी गई है।

समझा जाता है कि भारतीय वायुसेना ने भी अपनी टोही निगाहें चीनी क्षेत्र में ज्यादा जमा दी हैं। एलएसी से करीब 300 किलोमीटर दूर होटान के रणनीतिक एयरबेस पर चीनी एयरफोर्स की सक्रिय गतिविधियों को देखते हुए वायुसेना विशेष रूप से सचेत है। पूर्वी लद्दाख मे 29-30 और 31 अगस्त को चीनी सेना ने नये इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की। मगर उनके इरादों का पूर्वानुमान लगा चुके भारतीय सैनिकों ने उसके अतिक्रमण के तीनों प्रयासों को ध्वस्त कर दिया। इन प्रयासों में मात खाने के बाद चीन उलटे अब भारत पर एलएसी का अतिक्रमण कर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है, जिससे भारत सिरे से खारिज कर चुका है।

बताया जाता है कि ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में चीन कह रहा है कि भारत पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी इलाके से पीछे हटे, जबकि भारत का कहना है कि पहले चीन उत्तरी इलाके से पीछे हटे। भारत का यह साफ कहना है कि दक्षिणी इलाके में चीन के इलाके पर उसने कब्जा नही किया है, बल्कि उसके सैनिक अपने इलाके में हैं। भारत के रुख से स्पष्ट है कि अब सेना की नजर एलएसी पर यथास्थिति बदलने की चीन की हर चाल पर है और ऐसे किसी प्रयास का वह माकूल जवाब देगी।

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीनी घुसपैठ के प्रयासों पर आक्रामक जवाबी रणनीति अपना रही भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे की चोटी पर अपना कब्जा जमाने के बाद अब इसके उत्तरी इलाके में भी अपनी स्थिति मजबूत बना ली है। भारत की बदली रणनीति से बौखलाए चीन के किसी दुस्साहस को थामने के लिए सेना की स्पेशल फोर्स के सैनिकों को पैंगोंग त्सो लेक के उत्तरी इलाके में विशेष रूप से तैनात कर दिया गया है। स्पेशल फोर्स के सैनिकों ने एलएसी पर इस इलाके में चीनी सेना की किसी चालबाजी को रोकने की रणनीति के तहत अपनी पोजीशन मजबूत कर ली है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर आक्रामक मोर्चेबंदी से उपजे हालात के चलते लगातार तीसरे दिन हुई ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।

सूत्रों ने बताया कि चुशूल सेक्टर में छह घंटे से भी लंबी चली ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में भारतीय सेना ने बदली रणनीति के तहत एलएसी पर अपनी मौजूदा पोजीशन में बदलाव की चीनी मांग को ठुकरा दिया। पूर्वी लद्दाख में पिछले चार दिनों के अंदर भारतीय सेना ने अपनी सैन्य मोर्चेबंदी के सहारे कई इलाकों में रणनीतिक बढ़त बनाई है। पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिणी किनारे में चीनी सेना को हतप्रभ करते हुए भारतीय सैनिकों ने ब्लैक टॉप चोटी पर काबिज होते हुए मंगलवार को इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। साथ ही इस क्षेत्र की दो अन्य चोटियां भी भारतीय सैनिकों के नियंत्रण में आ चुकी हैं। सेना इस रणनीतिक बढ़त को चीन पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। ताकि चीनी सैनिक एलएसी के उन इलाकों से पीछे हटें जहां वे पिछले तीन-चार महीने से डटे हैं।

पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिणी इलाके में ऊंची चोटियों पर पहुंचे भारतीय सैनिकों को हटाने के लिये चीन ने मंगलवार को दोबारा कोशिश की, लेकिन अलर्ट सेना के जवानों के आगे चीनी सैनिकों को बैरंग लौटना पड़ा। चीनी सेना ने घुसपैठ का यह प्रयास तब किया, जब चुशुल में ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता चल ही रही थी। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने अपनी पोजीशन मजबूत करने के साथ ही पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी किनारे के इलाके में अतिरिक्त संख्या में सैनिकों की तैनाती भी कर दी है। साथ ही टैंक समेत दूसरे हथियारों और एंटी टैंक मिसाइल की संख्या भी वहां बढ़ा दी गई है

समझा जाता है कि भारतीय वायुसेना ने भी अपनी टोही निगाहें चीनी क्षेत्र में ज्यादा जमा दी हैं। एलएसी से करीब 300 किलोमीटर दूर होटान के रणनीतिक एयरबेस पर चीनी एयरफोर्स की सक्रिय गतिविधियों को देखते हुए वायुसेना विशेष रूप से सचेत है। पूर्वी लद्दाख मे 29-30 और 31 अगस्त को चीनी सेना ने नये इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की। मगर उनके इरादों का पूर्वानुमान लगा चुके भारतीय सैनिकों ने उसके अतिक्रमण के तीनों प्रयासों को ध्वस्त कर दिया। इन प्रयासों में मात खाने के बाद चीन उलटे अब भारत पर एलएसी का अतिक्रमण कर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है, जिससे भारत सिरे से खारिज कर चुका है।

बताया जाता है कि ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता में चीन कह रहा है कि भारत पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी इलाके से पीछे हटे, जबकि भारत का कहना है कि पहले चीन उत्तरी इलाके से पीछे हटे। भारत का यह साफ कहना है कि दक्षिणी इलाके में चीन के इलाके पर उसने कब्जा नही किया है, बल्कि उसके सैनिक अपने इलाके में हैं। भारत के रुख से स्पष्ट है कि अब सेना की नजर एलएसी पर यथास्थिति बदलने की चीन की हर चाल पर है और ऐसे किसी प्रयास का वह माकूल जवाब देगी।

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