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विधानसभा अध्यक्ष पर टिकी सबकी निगाहें, विधायकों के इस्तीफे पर आज लेंगे फैसला

लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस के विधायक भी राहुल गांधी की राह पर चल रहे हैं। कर्नाटक में चल रहा सत्ता का ‘नाटक’ अब महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली और गोवा तक फैल गया है। मुंबई के होटल में रुके हुए जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस के विधायकों के पहले गोवा शिफ्ट होने की बात सामने आई लेकिन मंगलवार सुबह साफ हुआ कि वह मुंबई में ही हैं। इस बीच बेंगलुरु में कांग्रेस, जेडीएस और बीजेपी की लगातार बैठकें हो रही हैं। बीजेपी अपनी सरकार बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस भी हार मानने को तैयार नहीं हैं। इस बीच आज हर किसी की नज़र विधानसभा अध्यक्ष पर है, जिनके हाथ में विधायकों के इस्तीफे का फैसला है।

जिन 14 विधायकों की वजह से कर्नाटक में गठबंधन की सरकार खतरे में है। इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस-जेडीएस के विधायक मुंबई चले गए लेकिन जब उन्हें पता चला कि कर्नाटक सरकार के सदाबहार संकटमोचक डीके शिवकुमार मुंबई पहुंच रहे तो वो विधायक मुंबई से गोवा के लिए निकल गए। कांग्रेस और जेडीएस के बड़े नेता पूरी ताकत से जुटे हैं कि किसी तरह सरकार बच जाए। इसके लिए दोनों पार्टियों के सभी मंत्रियों ने सरकार से इस्तीफा भी दे दिया जिससे नाराज विधायकों को मंत्री बनाया जा सके और इसके जरिए सरकार को बचाया जा सके। लेकिन इसके साथ ही अपने-अपने विधायकों को बचाए रखने का बंदोबस्त भी किया गया है जिससे कोई विधायक दूसरे खेमे में ना फिसल जाए। वहीं जेडीएस ने अपने बचे हुए विधायकों के लिए कर्नाटक में ही कोडुगू के एक रिजॉर्ट के 35 कमरे बुक किए हैं। लेकिन सत्ता के सामने कोई भी खर्च मायने नहीं रखता।

बता दें कि कर्नाटक में संकट में घिरी जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन सरकार की हालत सोमवार को तब और ज्यादा खराब हो गई, जब निर्दलीय विधायक और लघु उद्योग मंत्री एच नागेश और आर शंकर ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर 13 महीने पुरानी गठबंधन सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। उधर, सरकार बचाने के लिए जेडीएस और कांग्रेस ने बागियों को मंत्री पद की पेशकश की तो उन्होंने ठुकरा दिया। अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश पर टिकी हैं। वह मंगलवार कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेंगे।

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