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विश्वास मत से पहले पाकिस्तानी PM इमरान खान को राहत, विपक्ष ने किया संसद के बहिष्कार का एलान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में इमरान खान सरकार आ नेशनल असेंबली में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करने वाली है। इस बीच विपक्षी दलों ने संसद का बहिष्कार करने का फैसला किया है। बुधवार को सीनेट के चुनाव में वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख की हार से फजीहत झेल रही इमरान सरकार को विपक्ष के इस फैसले से बहुत राहत मिली है। विपक्षी दलों का कहना है कि सीनेट चुनाव में उनके प्रत्याशी की जीत ही प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव था। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि विपक्ष का कोई सदस्य नेशनल असेंबली की बैठक में भाग नहीं लेगा। इससे पहले इमरान खान ने संसद में अपनी रणनीति तय करने के लिए शुक्रवार को सहयोगी दलों के साथ बैठक की।

गौरतलब है कि सीनेट के चुनाव में  सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रत्याशी अब्दुल हफीज शेख को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने हरा दिया। यह इमरान सरकार के लिए बड़ा झटका  है। इमरान खान ने खुद शेख के लिए प्रचार किया था। गिलानी की जीत से उत्साहित विपक्षी दलों ने इमरान का त्यागपत्र मांगना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि इमरान खान ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत हासिल करने की घोषणा कर दी।

इस बीच, विपक्ष की नेता मरयम नवाज ने कहा कि देश के सैन्य नेतृत्व को प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ नहीं दिखना चाहिए। इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की उपाध्यक्ष मरयम ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान संस्थाओं को राजनीति में घसीट रहे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने गुरुवार को प्रधानमंत्री आवास में इमरान से मुलाकात की थी। आइएसआइ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद भी इस दौरान मौजूद थे।

इमरान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री नहीं हैं, जिन्हें नेशनल असेंबली में विश्वास मत का सामना करना पड़ा है। इससे पहले संविधान के आठवें संशोधन के तहत, 1985 से 2008 तक, पाकिस्तान के सभी प्रधानमंत्रियों ने नेशनल असेंबली में विश्वास मत का सामना किया है। इनमें स्वर्गीय बेनजीर भुट्टो, नवाज शरीफ, मीर जफरुल्लाह जमाली, चौधरी शुजात, शौकत अजीज और यूसुफ रजा गिलानी शामिल है। हालांकि, इमरान खान पाकिस्तान के इतिहास में  दूसरे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने खुद विश्वास मत हासिल करने का एलान किया है । इससे पहले, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 1993 में ऐसा किया था।

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