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अनलाक होते ही सुकमा में अमचूर की आवक शुरू

सुकमा। जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण लक्ष्‌य के करीब पहुंच चुका है। वहीं अनलाक होते ही अमचूर की आवक बढ़ गई है। साप्ताहिक बाजार बंद होने के कारण व्यापारी गांव-गांव जाकर अमचूर खरीद रहे हैं। अनलाक के पहले दिन जिला मुख्यालय से लेकर गांवों में अमचूर की खरीददारी जमकर की गई, जो लाकडाउन के कारण नहीं हो पा रही थी और हर वर्ष की तुलना में आमचुर की खरीददारी काफी पिछड़ी हुई है। पिछले दो माह से बाजारों की रौनक गायब थी। ग्रामीण इलाकों में आय का मुख्य श्रोत अमचूर भी है। लाकडाउन के कारण इसकी खरीदी नहीं हो रही थी। बुधवार को अनलाक के पहले दिन व्यापारियों ने काफी अमचूर खरीदा। अमचूर का भाव 70 रुपये किलो है। ऐसे में हर आदिवासी परिवार के पास अच्छी रकम चली जाती है। लाकडाउन में अधिकांश गांव वालों ने जंगलों से आम एकत्रित कर अमचूर बड़ी मात्रा में बनाया है।

लक्ष्‌य के करीब तेंदूपत्ता खरीदी

जिले में लाकडाउन के दौरान तेंदूपत्ता तुड़ाई व खरीददारी चालू थी। लिहाजा तेंदूपत्ता की खरीददारी लक्ष्‌य के करीब पहुंच चुकी है। फिलहाल खरीदी बंद है। इस साल 90 हजार 400 मानक बोरा का लक्ष्‌य रखा गया था। इसके विपरीत अब तक 73 हजार 887 मानक बोरा की खरीददारी हो चुकी है। इसका भुगतान करीब 29 करोड़ 55 लाख के लगभग होगा। इतनी बड़ी रकम हितग्राहियों को नगदी मिलेगी। इससे ग्रामीण इलाकों में आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और बाजारों में रौनक बढ़ेगी।

वर्जन

जिले के अनलाक होते ही व्यापारी अमचूर खरीद रहे हैं। इसका फायदा आदिवासियों को मिलेगा।

– बोड्डू राजा, उपाध्यक्ष, जिपं सुकमा

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