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अब बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर बच्चों की भी होने लगी जांच

बिलासपुर। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग खास सतर्कता बरत रहा है। ट्रेन में संक्रमण फैल सकता है। इसे देखते हुए बिलासपुर स्टेशन में अब स्वजनों के साथ सफर करने वाले बच्चों की विशेष जांच की जा रही है। पहले बच्चों की कोरोना जांच नहीं होती थी।

तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका ज्यादा होने को देखते हुए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सोमवार से की गई व्यवस्था के संबंध में स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जांच होने से संक्रमित बच्चों की पहचान हो सकेगी और समय पर चिकित्सकीय सुविधाएं भी मिल जाएंगी।

ट्रेन को भी संक्रमण फैलने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। यही वजह है कि दूसरी लहर की दस्तक के साथ ही बिलासुर रेलवे स्टेशन में स्वास्थ्य अमले को तैनात कर दिया गया। 16 मार्च से गेट क्रमांक चार पर टीम तैनात है।

यात्रा से पहले 72 घंटे की निगेटिव रिपोर्ट भी अनिवार्य है। यदि रिपोर्ट नहीं है तो उनकी जांच की जाती है। हालांकि जांच से बच्चों को दूर रखा गया था। केवल स्वजनों की जांच होती थी। इधर, स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों की जांच को अनिवार्य कर दिया है। इसमें दूधमुंहे बच्चे भी शामिल हैं।

फिलहाल ट्रेनों में भीड़ कम है, इसलिए बहुत कम यात्री ऐसे हैं, जो बच्चों को साथ लेकर सफर कर रहे हैं। सोमवार को स्वजन व बच्चों को मिलाकर 350 से अधिक यात्रियों की जांच की गई।

अब 48 घंटे की रिपोर्ट अनिवार्य

सफर के दौरान यात्रियों के पास अब 48 घंटे की जांच रिपोर्ट अनिवार्य है। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। पूर्व में 72 घंटे की निगेटिव रिपोर्ट की अनिवार्यता की गई थी।

सात दिन आइसोलेट रहने की समझाइश

सफर के दौरान संक्रमित होने का ज्यादा खतरा है। इसे देखते हुए ही जिनमें लक्षण नहीं है उन्हें भी सात दिन होम आइसोलेट होने की समझाइश दी जा रही है, ताकि परिवार के अन्य सदस्यों के संक्रमित होने की आशंका ना रहे।

इन्होंने कहा

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर अब सफर से आने वाले बच्चों की भी जांच की जा रही है। यदि संक्रमित मिलते हैं तो उन्हें स्टेशन में ही दवा दी जाएगी। होम आइसोलेट व अस्पताल में भर्ती होने का विकल्प भी है।

डा. मनीष सिंह

रेलवे स्टेशन जांच प्रभारी, स्वास्थ्य विभाग

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