आत्मसमर्पित नक्सलियों को नई पहचान दे रही पुलिस

दंतेवाड़ा। छत्तीसग़ढ़ के दंतेवाड़ा जिले में गन छोड़ गणतंत्र पर भरोसा जताने वाले नक्सलियों को पुलिस नई पहचान देने में जुटी है। दरअसल नक्सल संगठन में रहते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं से दूर रहने का पाठ पढ़ाया जाता था। इसके चलते पूर्व नक्सलियों ने कभी आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड या इस तरह की कोई भी सरकारी आइडी नहीं बनवाई। जब ये बंदूक लेकर जंगल-जंगल भटकते थे तब तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर मुख्यधारा की जिंदगी में पहचानपत्रों के बिना काम नहीं चलता। आत्मसमर्पित नक्सलियों की इस समस्या का समाधान करने के लिए पुलिस सामने आई है। इनके हर तरह के परिचयपत्र बनवाए जा रहे हैं और बैंकों में उनका खाता भी खुलवाया जा रहा है।
दंतेवाड़ा पुलिस लोन वर्राटू यानी घर वापसी अभियान चला रही है। इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है। बीते कुछ महीनों में जिले में 375 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 99 इनामी थे। दंतेवाड़ा पुलिस ने बाकायदा इनकी कुंडली तैयार की। पुलिस के नक्सल रजिस्टर में करीब डेढ़ हजार लोगों के नाम, पते दर्ज हैं। पुलिस ने उनके गांवों में जाकर पंचायत भवन, मुख्य गलियों व उनके घर के आगे उनके नाम का पोस्टर चस्पा कर दिया है। उनके स्वजनों को समझाया जा रहा है कि उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करें, ताकि हिंसा का रास्ता त्यागकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
इन प्रयासों का असर दिखा पर बाद में एक नई समस्या खड़ी हो गई। आत्मसमर्पण करने वालों के पास पहचानपत्र और बैंक खाता न होने से मजदूरी समेत अन्य कामों में दिक्कत आने लगी। तब पुलिस ने इस समस्या के समाधान का बीड़ा उठाया। पुलिस ने कटेकल्याण थाना क्षेत्र के 95, किरंदुल के 85, बारसूर के 70, कुआकोंडा के 57, अरनपुर के 32, भांसी के 33, फरसपाल थाना क्षेत्र के आठ तथा बचेली, मालेवाही व दीगर थाना क्षेत्रों के 68 पूर्व नक्सलियों को नई पहचान दिलाई है। उनके बैंक खाते खुलवाए हैं। मतदाता सूची में नाम जुड़वाकर वोटर आइडी बनाई है।
योजनाओं का लाभ दिलाने अफसर नियुक्त
आत्मसमर्पित नक्सलियों की मदद के लिए प्रशासन भी सामने आया है। प्रशासन ने सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अलग-अलग अधिकारी नियुक्त किए हैं। उनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने, जाब कार्ड बनवाने, स्वसहायता समूहों से जोड़कर रोजगार सृजन करवाने की जिम्मेदारी ब्लाक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की है। स्वास्थ्य विभाग उनका आयुष्मान कार्ड बना रहा है। यात्री किराया में 60 फीसद छूट का कार्ड परिवहन विभाग बना रहा है। वन अधिकार पत्रक, उज्ज्वला योजना व इसी प्रकार की 14 अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हर विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।





