समस्याओं के बीच जीवन यापन को मजबूर ग्रामीण

बरबसपुर। पंचायत प्रतिनिधि की उदासीनता व शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। गांव की छोटी- छोटी समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण ग्राम पंचायत में अपनी प्रतिनिधि चुनते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं। अधिकारी कर्मचारी भी ध्यान नहीं देते हैं। कुछ ऐसा ही हाल ग्राम पंचायत बरबसपुर का है, जहां लोग समस्याओं के बीच जीवनयापन करने में मजबूर हैं।
जनपद पंचायत कवर्धा के ग्राम पंचायत बरबसपुर जो कबीरधाम जिले में बड़े-बड़े भाजपा कांग्रेस दिग्गज नेताओं का नाता है गांव से, पर नेता का कोई सरोकार नहीं है। ग्राम बरबसपुर कीचड़ और गंदगी में भरी हुई है। यहां निवासरत ग्रामीण छोटी-बड़ी समस्याओं के बीच किसी तरह जीवन यापन करने मजबूर नजर आ रहे हैं। ग्राम पंचायत बरबसपुर भाजपा के गढ़ कवर्धा जनपद पंचायत के राजनीतिक चाणक्य का ग्राम रहा है। जहां की जनसंख्या लगभग 2000 से ऊपर है। इतनी बड़ी आबादी होने के बाद भी उपेक्षित है। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।ऐसे में ग्रामीण विकास की बातें करना बेमानी होगी। ग्राम पंचायत की बरबसपुर की गलियां कीचड़ गंदगी से भरी हुई हैं और विकास के लिए मोहताज है।
विकास कार्य की दरकार
ज्यादातर वार्ड में पानी निकासी के लिए पक्की नाली का अभाव है। वहीं जिस वार्डों में नाली निर्माण हुआ है वह भी जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में नाली का गंदा पानी गलियों में बहा रहा है। इसके चलते गलियां दलदल में तब्दील हो गई है। गलियों में सीसी रोड निर्माण के साथ पानी निकासी के लिए नाली निर्माण करा दिया जाए तो वार्डवासियों को राहत मिल सकती है, लेकिन इस ओर पंचायत प्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं दे रहा है। पंचायती राज के सदन ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला पंचायत को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि गांव का तस्वीर बदल सके।