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डीपी विप्र कालेज प्रबंधन की रिट याचिका हाई कोर्ट ने की खारिज

बिलासपुर। डीपी विप्र कालेज प्रबंधन द्वारा एकलपीठ के फैसले को चुनौती देने वाली रिट याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने याचिकाकर्ता महाविद्यालय प्रबंधन को राहत देते हुए कहा कि चाहे तो याचिकाकर्ता एकलपीठ में याचिका दायर कर सकता है। सहायक प्राध्यापक के निलंबन आदेश को हाई कोर्ट की एकलपीठ ने रद कर दिया था। इसे फैसले के खिलाफ महाविद्यालय प्रबंधन ने युगलपीठ में रिट याचिका दायर की थी। रामाधार प्रसाद पांडेय डीपी विप्र महाविद्यालय में अर्थशास्त्र के सहायक प्राध्यापक के पद पर पदस्थ थे। 14 अगस्त 2020 को आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने निलंबित कर दिया। इस प्रकरण में आयुक्त का अनुमोदन नहीं आया तो याचिकाकर्ता ने कालेज में अपना अभ्यावेदन पेश कर नौ नवंबर 2020 को संस्था में उपस्थित होने कि अनुमति मांगी। इसके बाद भी प्राचार्य ने 11 नवंबर को आवेदन निरस्त कर दिया।

महाविद्यालय प्राचार्य के आदेश को चुनौती देेते हुए रामाधार पांडेय ने वकील आरके केशरवानी व पलाश तिवारी के माध्यम से याचिका पेश की। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने डीपी विप्र कालेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसी मामले में बीते 28 जून को उच्च शिक्षा आयुक्त ने अनुमोदन ना कराए जाने को आधार बनाते हुए याचिकाकर्ता का निलंबन समाप्त कर दिया था।

सुनवाई के दौरान उच्च शिक्षा आयुक्त द्वारा जारी आदेश की जानकारी याचिकाकर्ता के वकील हाई कोर्ट को बताई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस पी सैम कोशी ने कालेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर सेवानिवृति से पहले बहाल करने और उसके बाद सेवानिवृत करने का आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता का रिटायरमेंट 30 जून को था। कोर्ट के फैसले की कापी लेकर याचिकाकर्ता कालेज प्रबंधन के पास गया। प्राचार्य ने बहाली आदेश जारी नहीं किया।

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