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उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहीं पांच बिजली कंपनियां

रायपुरराज्य में बिजली व्यवस्था में सुधार के नाम पर बिजली बोर्ड का किया गया कंपनीकरण उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रहा है। पांच अलग-अलग कंपनी होने से स्थापना व्यय के साथ टैक्स का भार बढ़ गया है। इसका सीधा असर बिजली की दरों पर पड़ रहा है। बिजली कंपनियों के इंजीनियर और कर्मचारी भी इससे नाखुश हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कंपनियों के एकीकरण का वादा किया था, लेकिन ढाई साल बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया है। इससे बिजली कर्मी नाराज हैं।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के संरक्षक पीएन सिंह का कहना है कि 2009 में जब बिजली बोर्ड का विखंडन किया जा रहा था, तभी हमने इसका विरोध किया था। इसके बावजूद बोर्ड को भंग करके पांच अलग-अलग कंपनियां बना दी गईं। इसका असर यह हो रहा है कि कंपनियां एक-दूसरे के साथ व्यापार कर रही हैं।

इससे हर कंपनी को अलग-अलग टैक्स भरना पड़ रहा है। बिजली बोर्ड मुनाफ में चल रहा था, लेकिन इस वक्त ज्यादातर कंपनिया नुकसान में हैं। इसका असर बिजली की दरों पर पड़ा है। कांग्रेस ने चुनाव से पहले कंपनियों के एकीकरण का वादा किया था, उसे पूरा करना चाहिए।

इस वर्ष मार्च में देनी थी रिपोर्ट

कंपनियों के एकीकरण के अपने वादे को पूरा करने के लिए सरकार ने प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें एकीकरण के स्थान पर कंपनियों की संख्या कम करने का प्रस्ताव आया है। सरकार ने इस प्रस्ताव के विश्लेषण का काम एक निजी कंपनी को सौंपने के साथ ही वरिष्ठ अफसरों की 13 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाई है। कंपनियों की संख्या कम करने की प्रक्रिया 31 मार्च 2021 तक पूरा करने की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट नहीं आई है।

निजी स्वार्थ के कारण नहीं हो रहा एकीकरण

कंपनियों के एकीकरण के बजाए संख्या कम करने को लेकर कर्मचारियों नेताओं ने इसके लिए कंपनी के ही इंजीनियर के स्वार्थ को जिम्मेदार बताया है। कर्मियों का आरोप है कि अपनी कुर्सी बचाने के चक्कर में अफसरों ने तीन कंपनी बनाने का फार्मूला तैयार किया है। पांच में से जिन दो कंपनियों होल्डिंग और ट्रेडिंग को बंद करने का प्रस्ताव है, उनका वैसे भी कोई औचित्य नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि तीन कंपनी बनाने से न तो राज्य और न ही उपभोक्ताओं को कोई फायदा होगा।

पांच में से चार कंपनियों के एमडी सेवानिवृत्त अफसर

कंपनियों में सेवानिवृत्त अफसरों को एमडी बनाए जाने पर भी कंपनी में विरोध है। इस वक्त एकमात्र होल्डिंग कंपनी की एमडी उज्जवला बघेल ही सेवा में हैं। उत्पादन कंपनी के एनके बिजौरा, पारेषण कंपनी के एसडी तेलंग, वितरण कंपनी के हर्ष गौतम और ट्रेडिंग कंपनी के एमडी राजेश वर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि कंपनीकरण करने के दौरान सरकार ने वादा किया था कि कंपनी के ही वरिष्ठ अफसर को एमडी बनाया जाएगा, लेकिन इस पर भी अमल नहीं हो रहा है। इससे अफसरों की पदोन्न्ति बाधित हो रही है।

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