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सर्व आदिवासी समाज ने कहा- मतांतरण गंभीर मुद्दा, सख्ती से लगाई जाए रोक

रायपुर। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे मतांतरण को लेकर सर्व आदिवासी समाज चिंतित है। समाज का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राज्यपाल अनुसुईया उइके से मिला। इस दौरान आदिवासियों की अन्य समस्याओं के साथ ही मतांतरण को लेकर चर्चा हुई। सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष सोहन पोटाई ने बताया कि राज्यपाल से मुलाकात के दौरान हमने मतांतरण पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने बताया कि मतांतरण गंभीर समस्या बनती जा रही है।

इस पर रोक लगाने के लिए समाज की तरफ से हर संभव प्रयास किया जा रहा है, लेकिन केवल समाज की कोशिश से यह नहीं रुकेगा। इस पर सरकार को भी गंभीर होना पड़ेगा, तभी मतांतरण जैसी समस्या पर रोक लग पाएगी। नेताम ने बताया कि राज्यपाल को आदिवासी समाज की विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया गया है।

उन्होंने आदिवासी जमीन पर अवैध अतिक्रमण, फर्जी आदिवासी बनकर मुआवजा लेना और गलत परिसीमन के कारण आरक्षित विधानसभा क्षेत्र का सामान्य हो जाना, आदिवासियों पर उत्पीड़न इत्यादि जानकारी दी गई है। राज्यपाल उइके ने उन्हें उनके समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।

इधर, भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में उठा मतांतरण का मुद्दा

भाजपा की प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में छत्तीसगढ़ में मतांतरण का मुद्दा उठा। प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में आयोजित बैठक में प्रदेश प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी ने कहा कि मतांतरण के कारण प्रदेश की आदिवासी संस्कृति प्रभावित हो रही है। इसे रोकने के लिए पार्टी पदाधिकारियों को आगे आना चाहिए।

पुरंदेश्वरी ने आदिवासी नेताओं से कहा कि वे मतांतरण के खिलाफ मुखर आवाज बनें। मीडिया से चर्चा में भी पुरंदेश्वरी ने राज्य सरकार पर मतांतरण के मुद्दे पर निशाना साधा। पुरंदेश्वरी ने कहा कि राज्य में मतांतरण के मामले आदिवासी इलाकों में बढ़े हैं। राज्य सरकार इसे रोकने में पूरी तरह से असफल रही है।

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