ब्रेकिंग
Hyderabad-Jaipur Weekly Express: रेलवे का बड़ा तोहफा; अब साप्ताहिक चलेगी हैदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस, इन... Raja Raghuvanshi Murder Case: ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम के नेपाल भाग... Ujjain Mahakal Elephant Controversy: महाकाल के हाथी 'श्यामू' को लेकर विवाद; वन विभाग की टीम को नहीं ... CM Mohan Yadav Sagar Visit: 14 जून को केसली पहुंचेंगे सीएम मोहन यादव; देवरी और केसली के लिए हो सकती ... Anganwadi Nutrition Scam: आंगनवाड़ी के लड्डू प्रीमिक्स में निकला सांप का बच्चा; जानें बच्चों को कैसे... Morena News: चंबल का मान बढ़ा; पैरा आर्म रेसलर निरंजन गुर्जर ने नेशनल चैंपियनशिप में जीते दो गोल्ड मे... Chhindwara MP Visit: सांसद बंटी विवेक साहू ने टेकापार और मानेगांव में लगाई चौपाल; समस्याओं का मौके प... Ratlam News: जावरा की डेयरी में दूध में मिलाया जा रहा था प्रोटीन पाउडर; खाद्य विभाग ने मारा छापा, भा... Diesel Theft in Shahdol: शहडोल में रेलवे की बड़ी लापरवाही; बुढार स्टेशन पर खड़े रेल इंजन से उड़ाया गया ... Jabalpur News: पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी; गोरखपुर थाने में...
देश

पति टॉर्चर न करें तो ससुराल चली जाऊंगी… और सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे खत्म कराई मियां-बीवी की ‘जंग’

 उच्चतम न्यायालय ने अलग रह रहे दंपति को मिलाने के लिए बुधवार को एक बार फिर अपने वर्चुअल द्वार खोल दिए और सुनिश्चित किया कि पति अपनी पत्नी को उसके सम्मान को कायम रखते हुए अपने घर वापस ले जाए। अदालत ने कहा कि विवाद समाधान के बाद उसके (पति) व्यवहार पर कुछ समय तक न्यायिक निगरानी रहेगी और उसे अपनी पत्नी के खिलाफ दायर सभी मुकदमे वापस लेने होंगे। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमण और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ पटना निवासी व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसकी अपनी पत्नी के साथ बहुत कड़वाहट भरी कानूनी लड़ाई चल रही थी।

व्यक्ति ने पत्नी के साथ वर्चुअल उपस्थिति का आग्रह किया था। पीठ ने हिंदी में पहले रांची के कांके निवासी महिला से पूछा कि क्या वह व्यक्ति के साथ पत्नी के रूप में रहने के लिए अपनी ससुराल वापस जाना चाहती है। महिला ने सुनवाई के शुरू में कहा, ‘‘मैं जाने को तैयार हूं, बस टॉर्चर ना करे।” इस दौरान उसका पति कैमरे के सामने हाथ जोड़कर बैठा रहा क्योंकि पीठ को उसकी आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने व्यक्ति से पूछा, ‘‘क्या तुम सभी मुकदमे वापस लेना चाहते हो। एक तुम्हारे पिता ने भी दर्ज कराया है।” व्यक्ति ने ‘हां’ में जवाब दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘कहीं यह जमानत पाने के लिए नाटक तो नहीं, हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे…हम इस याचिका को लंबित रख रहे हैं। सारे मुकदमे वापस लो। एफिडेविट दो। हम छोड़ेंगे नहीं। अन्यथा, तुम्हें वापस जेल जाना होगा।” इसने व्यक्ति को अदालत में किया गया वायदा तोड़ने के खिलाफ आगाह किया और यह बताने के वास्ते शपथपत्र दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया कि वह तलाक की याचिका सहित अपनी पत्नी के खिलाफ दायर किए गए सभी मुकदमे वापस ले लेगा और इस बीच उसके सम्मान को कायम रखते हुए उसे वापस अपने घर ले जाएगा। व्यक्ति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश ने पैरवी की।

पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि अपनी पृष्ठभूमि की वजह से वह अलग रह रहे पति-पत्नी को विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण ढंग से करने की सलाह दे सकती थीं। इससे पहले, प्रधान न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ ने 28 जुलाई को भी अपने वर्चुअल द्वार खोलकर अलग रह रहे आंध्र प्रदेश निवासी एक दंपति से बात की थी और उन्हें कानूनी लड़ाई खत्म करने के लिए तैयार किया था। शीर्ष अदालत ने 21 साल से कड़वाहट भरी कानूनी लड़ाई लड़ रहे इस दपंति को एक कराने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए थे और पत्नी को दहेज उत्पीड़न मामले में पति की सजा बढ़ाने का आग्रह करने वाली याचिका वापस लेने को तैयार किया था।

Related Articles

Back to top button