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जिस अफसर के खिलाफ एसीबी कर रही जांच, उसे सेवानिवृत्ति के बाद दी संविदा

रायपुर: स्कूल शिक्षा विभाग के जिस सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत है, उन्हें दोबारा संविदा नियुक्ति दे दी गई है। विभाग के संयुक्त संचालक कैलाशचंद्र काबरा मई में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत हो चुकी है और जांच लंबित है, इसके बाद भी संविदा नियुक्ति मिलने से विभाग में चर्चा गर्म हो गई है।

बता दें कि विभाग में कैलाशचंद्र काबरा की उप संचालक से संयुक्त संचालक पद पर पदोन्नति ही विवादास्पद है, क्योंकि स्वीकृत आठ पद को बढ़ाकर 14 संयुक्त संचालक बनाया गया है।

यानी जिस पदोन्नति का शुरू से ही आधार गलत है, उसकी जांच और कार्रवाई तो दूर विभाग नियमों के खिलाफ जाकर नियुक्ति और संविदा देने में लगा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ इस संयुक्त संचालक पदोन्नति को ही समान्य प्रशासन विभाग की जांच में अवैध पाने के कारण स्कूल शिक्षा विभाग के तत्कालीन अवर सचिव के खिलाफ विभागीय जांच बैठाई जा चुकी है। वहीं, दूसरी तरफ इस पदोन्नति को सही मानकर अवैध (यानी बिना पदानवत किए) विभाग उसी अधिकारी को निरापद सेवानिवृत मानकर संविदा भी दे रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग और पीएससी दोनों स्कूल शिक्षा विभाग को रिव्यू डीपीसी करने के लिए कह चुके हैं। यदि इनके निर्देशों का पालन होता तो काबरा सहित छह उप संचालक पदावनत ही किए जाते।

वरिष्ठ के ऊपर बैठाया कनिष्ठ संविदा अफसर

दूसरी तरफ समग्र शिक्षा अभियान में संविदा वाले कैलाश चंद्र काबरा को वरिष्ठ अधिकारी से ऊपर बिठा दिया गया है। यहां वरिष्ठ अधिकारी संजीव श्रीवास्तव अभी संयुक्त संचालक हैं। उनके ऊपर कैलाशचंद्र काबरा अतिरिक्त प्रबंध संचालक रहेंगे। नियुक्ति से पहले समग्र शिक्षा की कार्यकारिणी से भी इस संविदा नियुक्ति का अनुमोदन नहीं लिया गया है जिसके प्रमुख स्वयं मुख्य सचिव होते हैं । बतादें कि समग्र शिक्षा अभियान केंद्र सरकार के फंड से संचालित होता है, ऐसे में केंद्र सरकार की राशि से इस संविदा अधिकारी को सैलरी दी जाएगी।

इन मामलों में भी अब तक कार्रवाई नहीं

केस 01- रायपुर में आरटीई घोटाला के आरोपियों को संरक्षण : शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत करोड़ों रुपयों के गड़बड़झाले के मामले में अफसरों ने सीधी कार्रवाई के बजाय जांच के नाम पर लेटलतीफी करने का फॉर्मूला अपनाया है। रायपुर में पूर्व डीईओ के कार्यकाल में हुए 76 लाख रुपये के घोटाले के मामले में संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव की जांच रिपोर्ट को अफसरों ने दबा दिया और इस मामले में आज तक कार्रवाई नहीं हो पाई है।

केस 02- अभनपुर में यात्रा भत्ता घोटाला : राजधानी से लगे अभनपुर विकासखंड में यात्रा भत्ता घोटाला का मामला सामने आ चुका है। आरोप है यहां के सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार वर्मा ने 16 महीने में बेहिसाब यात्रा करके दो लाख 37 हजार रुपये फूंक डाले हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्च स्तर के अधिकारियों तक शिकायत हो चुकी है पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो पाया है।

केस 03- तिल्दा में बर्तन ढुलाई में भ्रष्टाचार: तिल्दा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मिड डे मील के लिए बर्तन ढुलाई में वसूली का मामला आ चुका है। इस मामले में केवल एक क्लर्क पर कार्रवाई हुई। शिकायत यहां के अधिकारी के खिलाफ भी थी पर कार्रवाई नहीं हो पाई।

वर्जन

जांच तो कई लोगों के खिलाफ हो रही है। कुछ मामले में कार्रवाई भी हो रही है। संविदा नियुक्ति राज्य शासन ने की है, उनसे जानकारी लीजिए। आरटीई में गड़बड़ी के मामले में विभागीय मंत्री महोदय से बात कीजिए।

– डॉ. आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा

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