ब्रेकिंग
पशुपालकों के लिए खुशखबरी! एमपी में अब सरकार खरीदेगी दूध, सीएम मोहन यादव ने किया बड़ा ऐलान Shocking Crime: पति की हैवानियत! चरित्र शंका में पत्नी को दी रूह कंपा देने वाली सजा, गंभीर हालत में ... Haryana BJP News: भाजपा नेता कौशल शर्मा को मिला मंत्री पद का दर्जा; संगठन ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी Government Update: जनगणना ड्यूटी से नदारद 289 अधिकारियों पर गिरेगी गाज, FIR दर्ज करने का आदेश जारी Tamil Nadu Elections 2026: 'थलापति' विजय का चला जादू; 2 साल पुरानी पार्टी TVK ने कैसे ढहाए दिग्गजों ... Tamil Nadu Elections 2026: विजय की पार्टी TVK की धमाकेदार जीत; चेन्नई स्थित आवास पर डांस और गानों के... PM Modi on Bengal Results: 'हिंसा नहीं, विकास चाहिए'; बंगाल फतह के बाद प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं ... Baramati Bypoll Result 2026: सुनेत्रा पवार की रिकॉर्ड जीत; 2 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से विरोधियो... MP Government Plan: ग्वालियर को सौगात! ऋषि गालव के नाम पर बनेगा नया विश्वविद्यालय, शिक्षा के क्षेत्र... Kerala Election Results 2026: केरल में कांग्रेस गठबंधन की सत्ता में वापसी; मुस्लिम लीग का 85% स्ट्रा...
देश

अफगानिस्तान संकट: अमेरिका के विदेश मंत्री और जयशंकर के बीच हुई फोन पर चर्चा

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने भारत के अपने समकक्ष एस जयशंकर से अफगानिस्तान में स्थिति पर फोन पर बात की और समन्वय जारी रखने पर सहमति जतायी।। तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर रविवार को अचानक कब्जा जमा लिया था।

विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने इसकी जानकारी दी। दरअसल 20 साल तक लड़े युद्ध के बाद अमेरिकी सेना के वापस जाने पर हुई तालिबान की इस जीत ने काबुल हवाईअड्डे पर अफरातफरी का माहौल पैदा कर दिया जहां से अमेरिका और अन्य सहयोगी देश हजारों नागरिकों और सहयोगियों को देश से सुरक्षित बाहर निकलने की कोशिश में हैं

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि अफगानिस्तान के घटनाक्रम ने स्वभाविक रूप से क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके प्रभावों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता पर काबिज हो गया है और उससे पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर हुए ।

जयशंकर ने कहा कि चाहे वह अफगानिस्तान में हो या भारत के विरूद्ध, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन बेखौफ अपनी गतिविधियां चलाते हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए, यह जरूरी है कि (सुरक्षा) परिषद हमारे सामने मौजूद समस्याओं पर चुनिंदा, चातुर्यपूर्ण या उदासीन रवैया नहीं अपनाए। हमें आतंकवादियों की पनाहगाहों का कभी समर्थन या उनके लिए संसाधनों को जुटाए जाने की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। ’’

Related Articles

Back to top button