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तालिबान नेता ने कहा, महिलाओं को पुरुषों के साथ काम करने की नहीं हो अनुमति

नई दिल्ली। अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जा जमाने वाले तालिबान के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि अफगान महिलाओं को पुरुषों के साथ काम करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। अगर इस नेता की बातों को औपचारिक तौर पर मान लिया जाता है तो अफगानिस्तान में महिलाओं के सरकारी दफ्तरों, बैंक, मीडिया और अन्य जगहों पर काम करने पर रोक लग जाएगी।

तालिबान नेतृत्व के करीबी वहीदुल्ला हासिमी ने कहा कि महिलाओं को उनका मनचाहा काम करने की अनुमति देने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद समूह शरिया को पूरी तरह से लागू करेगाय। हासिमी ने कहा, ‘हमने अफगानिस्तान में शरिया कानून व्यवस्था लागू करने के लिए चार दशकों तक लड़ाई लड़ी है। शरिया महिलाओं और पुरुषों को एक साथ काम करने या एक छत के नीचे साथ बैठने की अनुमति नहीं देता है।’ उसने कहा कि यह स्पष्ट है कि महिला और पुरुष एक साथ काम नहीं कर सकते हैं। महिलाओं को हमारे दफ्तरों और मंत्रालयों में आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

तालिबान ने महिलाओं को लेकर वादा तोड़ा

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की प्रमुख मिशेल बाचेलेत ने कहा है कि तालिबान ने महिलाओं के मामले में अपने वादों को पूरा नहीं किया है। उन्होंने मानवाधिकार परिषद को बताया कि तालिबान के कब्जे के बाद उसके द्वारा की गई बातों से जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। तालिबान के शासन में महिलाएं, अल्पसंख्यक, जातीय और धार्मिक समुदाय अपने अधिकारों के प्रति चिंतित हैं। पिछले तीन सप्ताह के तालिबान के कार्य निराश करने वाले हैं। तालिबान ने कहा था कि वह महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण करेगा, लेकिन ऐसा हकीकत में नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि तालिबान ने पूर्व सुरक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों को आम माफी के वादे को भी पूरा नहीं किया है।

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