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अफगानिस्तान पर कतर के अमीर की वैश्विक नेताओं से अपील, तालिबान का ना करें बहिष्कार

दुबई। कतर के अमीर ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में एकत्रित वैश्विक नेताओं से अफगानिस्तान के तालिबान शासकों से मुंह न मोड़ने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कतर ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कतर के शासक शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने तालिबान के साथ बातचीत जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बहिष्कार से केवल ध्रुवीकरण और अन्य प्रतिक्रियाएं होती हैं, जबकि बातचीत सकारात्मक परिणाम ला सकती है।

तालिबान का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहते हैं। समूह ने अफगानिस्तान के पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत से संयुक्त राष्ट्र महासभा की वैश्विक नेताओं की उच्च स्तरीय बैठक में बोलने की मांग की थी। उनका कहना है कि उनकी सरकार को मान्यता देना और अन्य देशों के लिए उनके साथ राजनयिक संबंध रखना संयुक्त राष्ट्र की जिम्मेदारी है

उल्लेखनीय है अभी तक, किसी भी देश ने औपचारिक रूप से तालिबान के सत्ता में आने या उसके मंत्रिमंडल को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। इस कैबिनेट में कोई महिला सदस्य नहीं है। हालांकि तालिबान ने अपनी कैबिनेट अंतरिम बताया है। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य की सरकार अधिक समावेशी हो सकती है।

शेख तमीम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस महत्वपूर्ण चरण में अफगानिस्तान का समर्थन करना जारी रखना चाहिए और मानवीय सहायता को राजनीतिक मतभेदों से अलग करना चाहिए। अफगानिस्तान दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है और हर साल अरबों डालर की विदेशी सहायता प्राप्त करता है। हालांकि यह अमेरिका समर्थित सरकार के सत्ता से बाहर होने और तालिबान के कब्जे के साथ बदल सकता है

अफगानिस्तान के एक अन्य पड़ोसी देश उज्बेकिस्तान ने युद्धग्रस्त देश को तेल और बिजली की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी है। राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने संयुक्त राष्ट्र में टिप्पणी करते हुए कहा, ‘अफगानिस्तान को अलग-थलग करना और इसे अपनी समस्याओं के दायरे में छोड़ना असंभव है।’ उन्होंने अफगानिस्तान पर एक स्थायी संयुक्त राष्ट्र समिति बनाने का आह्वान किया।

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