पीसीसी की हिदायत, कमेटी में एक ही कार्यकर्ता को मिले जिम्मेदारी

बिलासपुर।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एक निर्देश ने ब्लाक कांगे्रस कमेटी के पदाधिकारियों की नींद उड़ा दी है। बूथ, जोन व सेक्टर कमेटियों में अलग-अलग कार्यकताओं को जिम्मेदारी देने की बात कही है। मतलब साफ है कि कमेटियों में पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए कर्मठ कार्यकर्ताओं को जगह मिलेगी। इसके लिए ब्लाक अध्यक्षों को मशक्कत भी करनी पड़ेगी।
बूथ, ोन व सेक्टर कमेटियों में पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए पीसीसी ने जो मापदंड जारी किया है उसके अनुसार पार्टी के प्रति ईमानदार व कर्मठ कार्यकर्ताओं की पूछपरख बढ़ेगी। ऐसे कार्यकर्ता जो अपने बूथों में चुनाव के दौरान एक-एक वोट को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने और पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में वोट कराने के लिए राजी करते हैं उनको अब मौका मिलेगा।
ब्लाक अध्यक्षों को ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान करनी होगी। या यूं कहें कि ब्लाक अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों के लिए यह अग्निपरीक्षा का दौर होगा जब उनको अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं को कमेटियों में काम करने के लिए राजी करना होगा। पीसीसी ने जो व्यवस्था बनाई है उसके अनुसार एक जोन में 12 से 15 बूथ को शामिल किया है।
इसी तहर एक सेक्टर में पांच से छह बूथ के बीच पदाधिकारियों को काम करना होगा। पीसीसी ने कमेटियों के पदाधिकारियों को अपना बूथ जीतो मंत्र दिया है। विधानसभा या फिर ब्लाक स्तर पर प्रचार-सार के बजाय छोटे स्तर पर काम करने और बूथों पर फोकस करना अभी से ही शुरू कर दिया है। पीसीसी की रणनीति है कि दिग्गज से लेकर बूथ लेबल के प्रभावी कार्यकर्ताओं को अपना बूथ जीतो लक्ष्य दिया जाएगा।
एक व्यवस्था यह भी
पीसीसी ने एक व्यवस्था और कर दी है। जिला व ब्लाक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी बूथ, जोन व सेक्टर कमेटियों के पदाधिकारी नहीं बन सकेंगे। मतलब साफ है कि एक कार्यकर्ता को एक ही कमेटी में काम करने की आजादी मिलेगी। पीसीसी की एक व्यवस्था यह भी है कि प्रदेश प्रभारी विधानसभा इंचार्ज होंगे और जिले के पदाधिकारी को जोन इंचार्ज की जिम्मेदारी मिलेगी।





