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कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने तुर्की को दिया कड़ा संदेश, पीएम मोदी का दौरा हुआ रद

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाने और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) में पाकिस्तान का समर्थन करने पर भारत ने तुर्की को कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की के दो दिन के दौरे को रद कर दिया है। वह इस महीने के आखिर में वहां जाने वाले थे। उस देश की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा थी। इससे पहले, मलेशिया से भी पाम आयल के आयात में कटौती के संकेत मिले थे। मलेशिया ने भी संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाया था और पाकिस्तान का समर्थन किया था।

संबंधों में आई दूरी का संकेत

प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े निवेश सम्मेलन में शामिल होने के लिए 27-28 अक्टूबर को सऊदी अरब जा रहे हैं। वहीं से वह दो दिन की यात्रा पर तुर्की जाने वाले थे। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग पर चर्चा होनी थी। लेकिन अब उनकी यात्रा रद हो गई है, जो तुर्की के साथ भारत के संबंधों में आई दूरी का संकेत है। हालांकि, दोनों देशों के बीच गर्मजोशी वाले संबंध कभी नहीं रहे हैं।

प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। लेकिन मंत्रालय के एक सूत्र ने आइएएनएस से कहा कि प्रधानमंत्री का दौरा तय ही नहीं हुआ था तो उसके रद होने का सवाल कहां उठता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी जी-20 की बैठक में शामिल होने के लिए आखिरी बार 2015 में तुर्की गए थे। उसके बाद इस साल जून में जापान के ओसाका में जी-20 की बैठक में उनकी एर्दोगन से मुलाकात हुई थी। इससे पहले जुलाई, 2018 में एर्दोगन दो दिन की भारत यात्रा पर आए थे।

दोनों देशों के बीच हालात बदले 

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में एर्दोगन द्वारा कश्मीर मुद्दे को उठाने पर हालात बदल गए हैं। एर्दोगन ने न सिर्फ कश्मीर मुद्दा उठाया था, बल्कि वहां भारत द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन से लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव तक का जिक्र कर डाला था। उन्होंने कश्मीर के हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

दो युद्धपोत खरीदने का सौदा भी रद 

भारत ने इसे गंभीरता से लिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने तब कहा था कि तुर्की को कश्मीर पर बयान देने से पहले यहां के जमीनी हालात को समझ लेना चाहिए था। बताया जा रहा है कि एर्दोगन के इस बयान के बाद भारत ने तुर्की से दो युद्धपोत खरीदने के सौदे को भी रद कर दिया है।

एफएटीएफ की बैठक में भी तुर्की ने मलेशिया और चीन के साथ पाकिस्तान का समर्थन किया था। माना जा रहा है कि इन देशों के समर्थन से ही पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से फिलहाल बच गया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एके पाशा का कहना है कि कश्मीर पर एर्दोगन का बयान हैरान करने वाला था। पिछले तीन दशक के दौरान तुर्की के सभी राष्ट्राध्यक्ष कश्मीर मुद्दे को शिमला समझौते के आधार पर द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने की बातें करते आ रहे थे।

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