ब्रेकिंग
कोरबा के बांगो बांध ने तोड़ा 3 साल का रिकॉर्ड: 83% से अधिक भरा जलाशय, जल्द खुल सकते हैं गेट जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में कायराना आतंकी हमला! छत्तीसगढ़ के दो युवाओं ने तोड़ा दम, सीएम साय ने दी श्... कांकेर में कलयुगी बेटे ने मां को लट्ठ से मार उतारा था मौत के घाट: शव को फांसी पर लटकाया, अदालत ने दी... एमपी सरकार ने किसानों के हित में लिए 2 बड़े फैसले, खाद वितरण में 'हाइब्रिड मोड' लागू व मूंग-उड़द खरी... एमपी में मूंग-उड़द की सरकारी खरीद की अंतिम तिथि बढ़ी! 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग, खाद वितरण का बदला नि... इंदौर में श्री मानभद्र भक्ति महोत्सव की धूम: आचार्य कुमुदनंद और विप्रणत सागर का मिला सान्निध्य, 10 ह... मंदसौर में MD ड्रग्स बनाने की फैक्ट्री पर पुलिस का बड़ा छापा! 3 क्विंटल केमिकल जब्त; जानें नीमच CBN ... जबलपुर में सिस्टम शर्मसार: सड़क न होने से 11 साल की बच्ची का शव हाथ ठेले पर ले जाने को मजबूर हुए परि... छिंदवाड़ा से शुरुआत! 7 अगस्त को पहले 'जन विश्वास कार्यक्रम' में शामिल होंगे सीएम मोहन यादव; सुनेंगे ... इंदौर के डॉक्टरों का कमाल: 130 डिग्री मुड़ी रीढ़ की हड्डी को 13 घंटे की सर्जरी से किया सीधा, लकवे की...
देश

कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने तुर्की को दिया कड़ा संदेश, पीएम मोदी का दौरा हुआ रद

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाने और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) में पाकिस्तान का समर्थन करने पर भारत ने तुर्की को कड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की के दो दिन के दौरे को रद कर दिया है। वह इस महीने के आखिर में वहां जाने वाले थे। उस देश की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा थी। इससे पहले, मलेशिया से भी पाम आयल के आयात में कटौती के संकेत मिले थे। मलेशिया ने भी संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाया था और पाकिस्तान का समर्थन किया था।

संबंधों में आई दूरी का संकेत

प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े निवेश सम्मेलन में शामिल होने के लिए 27-28 अक्टूबर को सऊदी अरब जा रहे हैं। वहीं से वह दो दिन की यात्रा पर तुर्की जाने वाले थे। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग पर चर्चा होनी थी। लेकिन अब उनकी यात्रा रद हो गई है, जो तुर्की के साथ भारत के संबंधों में आई दूरी का संकेत है। हालांकि, दोनों देशों के बीच गर्मजोशी वाले संबंध कभी नहीं रहे हैं।

प्रधानमंत्री की यात्रा को लेकर विदेश मंत्रालय की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। लेकिन मंत्रालय के एक सूत्र ने आइएएनएस से कहा कि प्रधानमंत्री का दौरा तय ही नहीं हुआ था तो उसके रद होने का सवाल कहां उठता है।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी जी-20 की बैठक में शामिल होने के लिए आखिरी बार 2015 में तुर्की गए थे। उसके बाद इस साल जून में जापान के ओसाका में जी-20 की बैठक में उनकी एर्दोगन से मुलाकात हुई थी। इससे पहले जुलाई, 2018 में एर्दोगन दो दिन की भारत यात्रा पर आए थे।

दोनों देशों के बीच हालात बदले 

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में एर्दोगन द्वारा कश्मीर मुद्दे को उठाने पर हालात बदल गए हैं। एर्दोगन ने न सिर्फ कश्मीर मुद्दा उठाया था, बल्कि वहां भारत द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन से लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव तक का जिक्र कर डाला था। उन्होंने कश्मीर के हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी पर सवाल उठाए थे।

दो युद्धपोत खरीदने का सौदा भी रद 

भारत ने इसे गंभीरता से लिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने तब कहा था कि तुर्की को कश्मीर पर बयान देने से पहले यहां के जमीनी हालात को समझ लेना चाहिए था। बताया जा रहा है कि एर्दोगन के इस बयान के बाद भारत ने तुर्की से दो युद्धपोत खरीदने के सौदे को भी रद कर दिया है।

एफएटीएफ की बैठक में भी तुर्की ने मलेशिया और चीन के साथ पाकिस्तान का समर्थन किया था। माना जा रहा है कि इन देशों के समर्थन से ही पाकिस्तान ब्लैक लिस्ट होने से फिलहाल बच गया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एके पाशा का कहना है कि कश्मीर पर एर्दोगन का बयान हैरान करने वाला था। पिछले तीन दशक के दौरान तुर्की के सभी राष्ट्राध्यक्ष कश्मीर मुद्दे को शिमला समझौते के आधार पर द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाने की बातें करते आ रहे थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button