पत्थर खदानों के लिए जनसुनवाई का दिखावा
अकलतरा । क्षेत्रीय कार्यालय पर्यावरण मंडल बिलासपुर के द्वारा मैसर्स श्री पारसनाथ मिनरल्स पार्टनर रूपेश जैन , मैसर्स कृष्णा मिनरल पार्टनर आनंद डालमिया एवं कृष्णा अग्रवाल व मैसर्स मां नारायणी क्रशर उद्योग पार्टनर संकेत मित्तल ,विनोद केडिया के चूना पत्थर खदानों के उत्खनन लीज के लिए जनसुनवाई का आयोजन नगर के योगेश सिंह बैस स्मृति भवन में अपर कलेक्टर एसपी वैद्य, एसडीएम विक्रांत अंचल एवं क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी देवब्रत मिश्रा की उपस्थिति में किया गया। यहां पर जनसुनवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। पूरी सुनवाई पूर्व नियोजित एवं प्रायोजित थी जिसमें प्रभावित गांव में ना तो कोई मुनादी कराई गई थी और ना ही इस संबंध में कोई जानकारी प्रभावित लोगों को दी गई थी।
नियमानुसार किसी भी जनसुनवाई के आयोजन के पूर्व प्रभावित ग्राम एवं आसपास के क्षेत्र में मुनादी कर क्षेत्र वासियों को सूचित किया जाता है ताकि क्षेत्रवासी जनहित के मुद्दों को जनसुनवाई में रख सकें साथ ही मीडिया को इसकी सूचना दी जाती है ताकि जनहित के मुद्दे लोगों के समक्ष आ सके लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। जन सुनवाई किस प्रकार हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनसुनवाई 11 बजे प्रारंभ होकर 12 बजे तक पूरी हो गई। इस 1 घंटे के दौरान चूना पत्थर खदान मालिकों के द्वारा भेजे गए 45 लोगों के द्वारा रटा रटाया सहमति प्रदान कर जनसुनवाई का केवल मखौल उड़ाया गया। जनसुनवाई का प्रबंधन इतना जबरदस्त था कि अधिकारियों को भी इस जनसुनवाई की तारीफ करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ऐसी जनसुनवाई उन्होंने पहली बार देखा है जिसमें इतने त्वरित ढंग से लोगों ने हिस्सा लिया एवं बिना किसी आपत्ति के 1 घंटे के अंदर जनसुनवाई हो गया। ज्ञात हो कि अकलतरा विकासखंड के ग्राम लटिया ,तरौद, किरारी बनाहिल सहित अन्य ग्रामों में 150 से भी ज्यादा चूना पत्थर खदान एवं 80 से ज्यादा स्टोन क्रशर संचालित हैं जिनमें पर्यावरण संरक्षण मंडल के द्वारा निर्धारित किए गए मानदंडों का परिपालन नहीं किया जाता है इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों के द्वारा आंख मूंदकर अवैध रूप से संचालित हो रहे चुना व पत्थर खदान एवं स्टोन क्रशर को मौन समर्थन दिए जाने के चलते क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है । अकलतरा क्षेत्र के तापमान में व्यापक परिवर्तन होनेके साथ-साथ चूना पत्थर खदानों के क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। जिन खदानों के लिए के नवीनीकरण के लिए जनसुनवाई का आयोजन किया गया था इन खदानों की लीज समाप्त होने के बाद भी इन खदानों से खनन किया जा रहा था। जिस पर खनिज अधिकारियों की नजर कभी नहीं पड़ती है ।
अभी भी क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा खदानों की लीज समाप्त होने के बावजूद उनमें खनन किया जा रहा है। जिन चूना पत्थर खदान मालिकों के द्वारा उत्खनन लीज की अनुमति मांगी गई है उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज की बारीकी से अध्ययन करने पर यह स्पष्ट है कि उत्खनन लीज के लिए आवश्यक पौधारोपण ,डस्ट को रोकने के लिए पानी छिड़काव एवं हेल्को ब्लास्टिंग के उपयोग पर प्रतिबंध, सड़क से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर खदान की स्थापना, खदान की गहराई 18 मीटर से ज्यादा ना होने सहित अन्य मूलभूत नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। जनसुनवाई में उत्खनन लीज प्राप्त करने के लिए पत्थर खदान संचालकों द्वारा तर्क दिया गया है कि इससे क्षेत्र में रोजगार का सृजन होगा लेकिन कुछ लोगों के रोजगार के लिए क्षेत्र के लाखों लोगों के जीवन व उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कहां तक उचित है। क्षेत्रवासियों के द्वारा जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए उत्खनन लीज के नवीनीकरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर जनसुनवाई को शून्य घोषित करने की मांग की गई है।
ब्लास्टिंग से घरों को हो रहा नुकसान
कई ग्रामों में सड़क से 15 -20 मीटर की दूरी पर चूना पत्थर खदान एवं स्टोन क्रशर का संचालन हो रहा है वहीं अधिकांश खदानों की गहराई 80 -90 मीटर से ज्यादा हो चुकी है। उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज में तथ्यों को छिपाकर एवं नियमों के परिपालन करने का दिखावा कर लीज नवीनीकरण कराने का प्रयास किया जा रहा है। उपरोक्त ग्रामों में पत्थर को तोड़ने के लिए प्रतिबंधित हेल्को ब्लास्टिंग का उपयोग किया जाता है जिसके चलते नगर के वार्ड क्रमांक 1,2, 18 एवं 19 व अन्य ग्रामों में पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन से ज्यादा घरों में खदान का पत्थर उछलकर घरों में गिरने से लोग दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं लटिया ,तरौद, किरारी ,बनाहिल सहित अन्य ग्रामो में हेल्को ब्लास्टिंग के चलते ग्राम वासियों के घरों में हुए दरारों को लेकर भी सैकड़ों शिकायतें खनिज विभाग एवं तहसील कार्यालय में की जा चुकी है।






