ब्रेकिंग
Indian Stock Market: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी बाजार पर संकट, 'सुपर अल नीनो' से क्यों... WhatsApp New Feature: अब नंबर देने की जरूरत नहीं! वॉट्सएप पर अपना यूजरनेम बनाने की सुविधा शुरू Draupadi Panchali: पांचाली क्यों कहलाईं द्रौपदी? पांडवों से विवाह के पीछे का पौराणिक कारण Bilaspur News: टेंट लगाने के दौरान मजदूर की करंट से दर्दनाक मौत, होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवा... मनेंद्रगढ़: गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देने वाली महिला गिरफ्तार, पुलिस ने बीएनएसएस की धाराओं मे... Rudreshwar Corridor Dhamtari: धमतरी को मिली बड़ी सौगात, 20 करोड़ की लागत से विकसित होगा रुद्रेश्वर धाम Rath Yatra Special Train: गोंदिया-पुरी के बीच चलेगी रथयात्रा स्पेशल ट्रेन, जानें टाइम-टेबल और रूट Dhamtari News: धमतरी के सत्यांशु दीप का स्पेशल ओलंपिक फुटबॉल टीम में चयन, स्वीडन में करेंगे भारत का ... एमसीबी हत्याकांड: तिहरे हत्याकांड के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग, मनेन्द्रगढ़ पहुंचे करणी सेना ... रायपुर: सुपरवाइजर और सेल्समैन बनाने का झांसा देकर ठगी, पुलिस ने फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने वाले ग...
धार्मिक

विनायक चतुर्थी पर अद्भुत योग, इन मंत्रों के जाप से परेशानियां होंगी दूर

इंदौर।  16 नवंबर (गुरुवार) को विनायक चतुर्थी है। इस दिन श्रीगणेश की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखा जाता है। विघ्नहर्ता की पूजा करने से जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है। सुख-समृद्धि और शांति आती है। यही कारण है कि भक्त विनायक चतुर्थी पर गणपति की विधिपूर्वक पूजन करते हैं। इस बार विनायक चतुर्थी पर शुभ संयोग बन रहे हैं।

विनायक चतुर्थी 2023 शुभ मुहूर्त

विनायक चतुर्थी 16 नवंबर को दोपहर 12.34 बजे शुरू होकर अगले दिन 17 नवंबर को सुबह 11.03 बजे समाप्त होगी।

सुकर्मा योग

विनायक चतुर्थी पर सुकर्मा योग बनेगा। यह योग सुबह 10 बजे तक रहेगा। इसके बाद धृति योग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में दोनों ही शुभ योग हैं। इस योग में भगवान गणेश की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

रवि योग

विनायक चतुर्थी पर रवि योग बन रहा है। इस योग में भगवान लंबोदर की पूजा करने से लाभ मिलता है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को शुभ माना जाता है। इस योग में शुभ कार्य किए जाते हैं।

सुख-समृद्धि के लिए विनायक चतुर्थी पर इन मंत्रों का जाप करें-

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्न कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वेदा।।

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।

नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।

अमेयाय च हेरम्ब परशुधारकाय ते।

मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः।।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Related Articles

Back to top button