ब्रेकिंग
Raipur Election Commissioners Meet: नवा रायपुर अटल नगर में 11 साल बाद राष्ट्रीय सम्मेलन, डिजिटल तकनी... Kawardha Sugarcane Farmers Update: शक्कर कारखाना में सरदार पटेल की प्रतिमा का भूमिपूजन, किसानों को र... Sudivya Kumar Sonu Shraddha: गुरुवार को होगा दिवंगत नेता का द्वादश श्राद्ध, प्रशासन ने सुरक्षा और ट्... Jharkhand School Sports News: खेलो झारखंड का कमाल, जूडो में नेशनल ट्रायल के लिए रायपुर रवाना हुए दो ... Caspian Cobra Snake Bite India: हिमाचल प्रदेश में कैस्पियन कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत, देश का ... Kainchi Dham Connectivity Update: श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी, काठगोदाम और ज्योलीकोट से जुड़ेगा ... Pithoragarh Lineman Death: शटडाउन लेने के बाद भी पोल पर चढ़े लाइनमैन की करंट लगने से मौत, ग्रामीणों ... IAS Tukaram Munde Exposes Hospital Bills: 11.50 रुपये का IV सेट 325 में क्यों? मेडिकल कंज्यूमेबल्स क... Yogi Government News: ओपी राजभर और अफसरों के बीच बढ़ा विवाद, जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों हो रह... Box Murder Mystery Lucknow: बेरहमी से हत्या कर बक्से में ठूंसकर फेंका गया शव, मोहनलालगंज और निगोहां ...
देश

शरद यादव की सक्रियता से बढ़ी लालू की बेचैनी, बड़ा सवाल: क्‍या शुरू की तीसरे मोर्चे की कवायद?

पटना। बिहार की राजनीति में फिर हलचल मची है। समाजवादी नेता शरद यादव (Sharad Yadav) ने महागठबंधन (Grand Alliance) के पांच में से तीन घटक दलों के प्रमुख नेताओं से बंद कमरे में बातचीत कर राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) की बेचैनी बढ़ा दी है। शरद यादव की क्रियाशीलता को प्रत्यक्ष तौर पर तीसरे मोर्चे (Third Front) की कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है, किंतु पर्दे के भीतर की कहानी यह भी है आरजेडी पर दबाव डालकर वे लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) से अपने लिए राज्यसभा (Rajya Sabha) की सदस्यता सुनिश्चित करना चाहते हैं।

रांची में लालू से मुलाकात, बड़े मुद्दों पर बात

बिहार कोटे की राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल में खाली होंगी। आरजेडी के खाते में दो सीटें आनी तय हैं। शरद यादव भी इसके लिए दावेदार हैं। इसी मकसद से उनकी रांची में शनिवार को लालू से मुलाकात भी हुई। इस दौरान दोनों नेताबों के बीच बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई।

शरद यादव के नाम पर सहमत नहीं तेजस्‍वी

सूत्रों का कहना है कि शरद के नाम पर तेजस्वी (Tejashwi Yadav) सहमत नहीं हैं। पटना में तीन दिनों तक रहते हुए भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात नहीं हो सकी। जबकि, तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा मानने से परहेज करने वाले जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) और मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) से शरद की लंबी मंत्रणा हुई। इसके भी दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि शरद को तेजस्वी की सरपरस्ती स्वीकार नहीं है और दूसरा, 74 वर्षीय शरद बताना-जताना चाह रहे हैं कि राजनीति में अभी वह पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं हुए हैं।

तेजस्वी के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश

बहरहाल, शरद यादव महागठबंधन के अन्य घटक दलों के सहयोग से तेजस्वी यादव के चारों ओर घेरा डालने की कोशिश में हैं। शरद यादव के फ्रंट पर आकर खेलने की बेचैनी का असर है कि मांझी, कुशवाहा और मुकेश सहनी को उनमें नेतृत्व का अक्स दिखने लगा है। हालांकि, आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) कहते हैं कि शरद देश के नेता हैं। बिहार तेजस्वी के लिए है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button