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ऑपरेशन सिंदूर से लेकर जनगणना 2027 तक…जानिए कौन हैं सुमिता मिश्रा, जिन्हें सरकार ने दी बड़ी जिम्मेदारी

सरकार ने अगली जनगणना की तिथि घोषित कर दी है. यह जनगणना 1 मार्च 2027 से शुरू होगी. हरियाणा सरकार ने इस जनगणना से संबंधित सभी गतिविधियों की देखरेख के लिए मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त सुमिता मिश्रा को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया.

बताया जा रहा है कि सुमिता मिश्रा अलग-अलग सरकारी विभागों, जनगणना विभाग और भारत सरकार के बीच एक प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने का काम करेंगी.

लखनऊ में जन्मी हैं सुमिता

सुमिता मिश्रा का जन्म 30 जनवरी 1967 में उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था. इन्होंने अर्थशास्त्र और गणित में अपनी डिग्री हासिल की है. उन्होंने 2015 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्ति की. पब्लिक पॉलिसी की समझ बढ़ाने के लिए उन्होंने कई विदेशी विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण की.

सरकार को दे चुकीं हैं कई तरह की सेवाएं

सुमिता मिश्रा अपने प्रोफेशन के दौरान हरियाणा सरकार को कई तरह की सेवाएं दे चुकी हैं. वह 1990 बैच की आईएएस अधिकारी हैं. उन्होंने हरियाणा में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), डिप्टी कमिश्नर (DC) और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाला. डॉ. मिश्रा ने 2018 से 2021 तक नई दिल्ली में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में अपनी सेवा दी. जिस दौरान उन्होंने सर्कुलर इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी सहित कई नीतिगत विषयों पर अपनी सलाह दी. इसके बाद उन्होंने 2022 से 2023 तक महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में कुलपति की रूप में काम किया.

ऑपरेशन सिंदूर के तहत निभाई अहम भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डॉ. मिश्रा ने हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य गृह सचिव के रूप में अपने जिम्मेदारियों का बहुत ही अच्छे ढंग से निर्वाह किया. उन्होंने इस ऑपरेशन के बाद राज्य की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी. मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद शहरों में आपात स्थिति से निपटने के लिए ‘ऑपरेशन अभ्यास’ की बारीकियों से देखरेख की. उन्होंने पंचकूला में नियंत्रण कक्ष से स्वयं इन अभ्यासों की देखरेख की. मिश्रा ने राज्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस, स्वास्थ्य और अग्निशमन सेवा विभागों के सभी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी थी.

कविताएं लिखने में है रुचि

सुमिता मिश्रा को साहित्य में काफी रुचि है. उन्होंने अपने जीवनकाल में कविता संग्रह की कई पुस्तकें लिखी. उन्होने 2012 में सबसे पहले ‘ए लाइफ ऑफ लाईट’ नाम की पुस्तक लिखी, जो 45 कविताओं का संग्रह है. इसके बाद उन्होंने 2013 में ‘जरा सी धूप’ नाम के शीर्षक के साथ एक पुस्तक प्रकाशित की, जो 75 कविताओं का एक संग्रह है. मिश्रा द्वारा लिखी इन पुस्तकों को लोगों ने ही नहीं बल्कि प्रसिद्ध कवियों द्वारा भी पसंद किया गया. प्रसिद्ध कवि अशोक वाजपेयी ने मिश्रा की इन पुस्तकों की काफी प्रशंसा की. वह अपनी कविताओं की कुछ झलकियां सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों के साथ साझा करती रहती हैं. वह चण्डीगढ़ साहित्यिक सोसायटी की संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं.

कई पुरस्कारों से किया जा चुका है सम्मानित

डॉ. सुमिता मिश्रा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. वर्ष 2024 में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने उन्हें ‘सम्मान पुरस्कार 2024’ से सम्मानित किया. ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ योजना लागू करने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने मिश्रा को ‘राज्य स्तरीय फ्लैगशिप पुरस्कार’ से नवाजा. इतना ही नहीं, उन्होंने कृषि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें वर्ष 2021-22 में बागवानी के लिए दिए जाने वाले ‘कृषि नेतृत्व पुरस्कार 2021’ से सम्मानित किया गया. वर्ष 2016-17 में मिश्रा को चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने उनकी कविता ‘वक्त के उजाले’ को लेकर ‘सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार’ दिया गया.

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