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जुमे की नमाज में तकरीर के साथ नैतिक शिक्षा भी, तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने इमामों को दी सलाह

गोरखपुर। शुक्रवार को जुमे की नमाज से पेश इमाम अब सिर्फ तकरीर नहीं करेंगे बल्कि समाज में व्याप्त तमाम तरह की समस्याओं और उसके समाधान पर भी चर्चा करेंगे। तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने मस्जिदों के इमाम को सलाह दी है कि मस्जिदों में नमाज, खासतौर पर जुमे की नमाज पढ़ने वाले को नमाज से पहले दी जाने वाली विशेष तकरीर में बच्चों को अच्छी तालीम, पर्यावरण संरक्षण, जल सरंक्षण, साफ-सफाई के साथ-साथ निकाह, तलाक और विरासत की बाबत शरीयत और पर्सनल लॉ के सही प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दें, ताकि लोगों का भ्रम दूर हो। तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने कई मस्जिदों के इमाम को पत्र भी लिखा है। कई मस्जिदों के पेश इमाामों ने इसपर अपनी सहमति दी है।

पेश इमाम के प्राथमिकता में होंगे सामाजिक मुद्​दे 

शहर के 175 से ज्यादा मस्जिदों में जुमे के अलावा पांचों वक्त की नमाज जमात के साथ होती है। जुमे के नमाज में ही मस्जिद में सबसे ज्यादा लोग जमा होते हैं इसलिए उन्हें सच्ची एवं अच्छी बात बनाते का सबसे मुनासिब वक्त होता है। अमूमन नमाज से पहले 15 से 25 मिनट की तकरीर  होती है। ज्यादातर पेशइमाम टीवी और सूचना के आधुनिक संसाधनों से दूर रहते हैं। उन्हें देश-दुनिया में चल रही बहुत सी चीजों के जानकारी नहीं हो पाती इसलिए वे अक्सर एक की विषय पर अपने विचार रखते हैं। इसे देखते हुए एक नई व्यवस्था की जा रही है जिसमें हर जुमे को अलग-अलग विषयो पर तकरीर होगी। इसका उद्​देश्य समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाना है। मसलन तकरीर से दहेज, नशा, अशिक्षा, पानी की बर्बादी, गंदगी आदि से होने वाले नुकसान और इससे बचने का सामूहिक संदेश शहर के मुसलमानों के बीच जाएगा। इस शुक्रवार को चार मस्जिदों में पर्यावरण संरक्षण विषय पर तकरीर होगी जिसे तंजीम कारवाने अहले सुन्नत ने तैयार किया है।

माजिक मामलात पर बोला जाए तो बहुत अच्छा होगा। इससे लोगों में जागरूकता आएगी। बहुत सी मस्जिदों में तकरीर नहीं हो पाती थी। इस पहल से वहां भी नमाजियों को सामाजिक बुराइयाें से दूर रहने की हिदायत दी जा सकेगी। – मुफ्ती मोहम्मद अजहर शम्सी, सदर, तंजीम कारवाने अहले सुन्नत 

ऐसे तैयार होगी तकरीर 

पहले एक विषय चुना जाएगा जिस पर तकरीर तैयार किया जा सके। इसके बाद विषय से जुड़े तथ्य इकट्ठा किए जाएंगे और फिर उर्दू में उसका प्रिंट निकालकर प्रत्येक बुधवार को मस्जिदों में पहुंचा दिया जाएगा। ताकि पेश इमाम को उसे पढ़ने और समझने का पूरा मौका मिल सके।

दीनी बातों के साथ सामाजिक मुद्​दों को प्राथमिकता में शामिल करना एक अच्छी पहल है। युवाओं को जागरूक कर उन्हें बहुत सी सामाजिक बुराइयों से बचाया जा सकता है। – हाफिज महमूद रजा कादरी, पेश इमाम चिश्तिया मस्जिद 

क्या करती है संस्था 

तंजीम कारवाने अहले सुन्नत गोरखपुर मजहबी व सामाजिक संगठन है। इसे 2014 में उलेमा-ए-किराम ने शुरू किया था। तंजीम के जेरे निगरानी ‘मकतब इस्लामियात’ शहर की कई मस्जिदों में कायम है जिसमें सैकड़ों बच्चों को नि:शुल्क मजहबी तालीम के साथ-साथ अच्छे संस्कार दिए जाते हैं। तंजीम समय-समय पर सेमिनार, चिकित्सा शिविर, जलसा सहित तमाम मजहबी कार्यक्रम आयोजित करती है। शम्सी लाइब्रेरी तुर्कमानपुर में इसका आफिस है।

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