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अमेरिका अफगानिस्तान में चाहता है स्थायी राजनीतिक समझौता, कहा- ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर ही बढ़ेंगे आगे

वाशिंगटन। अमेरिका तालिबान से हुए समझौते का पूरी तरह पालन कर रहा है। अब वह शांति वार्ता के जरिए अफगानिस्तान में शांति के लिए स्थायी राजनीतिक समझौता चाहता है। जिससे वहां पर चल रही संघर्ष की स्थिति को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इधर अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय ने कहा है कि वार्ता के दौरान भी हिंसा की स्थिति बढ़ती जा रही है। तालिबान के अभी भी अलकायदा संगठन ने संबध बने हुए हैं।

ट्रंप प्रशासन के समझौतों पर लगाई मुहर

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जैक सुलीवान ने कहा कि बाइडन प्रशासन पूर्व के ट्रंप प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान में सभी पक्षों के साथ किए गए समझौते का पूरी तरह से समर्थन करता है। ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में दोहा में तालिबान के साथ समझौता किया था। समझौते के अनुसार अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही सभी पक्षों ने अफगानिस्तान में शांति के लिए अपनी गारंटी दी थी।

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12 हजार सैनिकों की होनी है वापसी

इस समझौते के तहत अमेरिका के 12 हजार सैनिकों की वापसी 14 सप्ताह में होनी है। अब उसके सिर्फ ढाई हजार सैनिक ही अफगानिस्तान में रह गए हैं। तालिबान ने अलकायदा सहित अन्य संगठनों के अफगान की धरती पर हिंसा न करने और अमेरिकी सेना पर हमला न किए जाने का गारंटी दी हुई है। जैक सुलीवान ने कहा कि हम इसी नीति पर आगे बढ़ेंगे। हमने अफगानिस्तान और तालिबान के बीच चल रही शांति वार्ता का भी समर्थन किया है।

तालिबान के हमलों में इजाफा

इधर अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता रहमतुल्लाह ने कहा कि समझौते की शर्तों में शामिल होने के बाद भी तालिबान के संबंध बराबर अलकायदा से बने हुए हैं। 11 अलकायदा आतंकी ऐसे पकड़े गए हैं, जो तालिबान के विभिन्न पदों पर नियुक्त थे। तालिबान ने कार बम विस्फोट, सड़कों पर आइडी विस्फोटों की संख्या बढ़ाई है। प्रमुख लोगों को निशाना भी बनाया जा रहा है।

हिंसा में आठ सैनिकों की मौत

अफगानिस्तान के पूर्वी नानगरहर प्रांत के शिरजाद जिले में सेना के एक काफिले पर हमला करके आठ सैनिकों को मार दिया गया। सेना ने एक अन्य हमले को नाकाम कर दिया। तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। कंधार में आतंकवादियों के हमले में एक बच्चे सहित तीन नागरिकों की मौत हो गई।

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