ब्रेकिंग
जालंधर की डॉक्टर के सोशल मीडिया वीडियो से मचा हड़कंप: LPU छात्रों को लेकर किए सनसनीखेज दावे Punjab Power Crisis: पंजाब में बिजली संकट गहराया, मांग 16,600 मेगावाट पार; जालंधर में सड़कों पर उतरे... Yamunanagar News: टोडरपुर गांव में बंदर को जिंदा निगल गया 15 फीट लंबा अजगर, वन्य जीव विभाग ने किया स... Homemade Soap for Sensitive Skin: घर पर बनाएं नेचुरल नीम-एलोवेरा साबुन, ड्राई स्किन और फंगल इंफेक्शन... Ranchi Crime News: रांची में डॉक्टर से 80.60 लाख रुपये की धोखाधड़ी, रिश्तेदार समेत 6 लोगों पर FIR दर... Ranchi Cyber Crime: बैंक ऑफ इंडिया के फर्जी ऐप से 70 वर्षीय बुजुर्ग से 4.90 लाख की ठगी, 6 आरोपियों प... Khunti Human Trafficking: खूंटी पुलिस ने नाकाम की मानव तस्करी की साजिश, 20 हजार की नौकरी का झांसा दे... Haryana Weather Update: हरियाणा में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 18 सितंबर तक झमाझम बारिश; यमुनानगर में आं... Haryana Sports News: बहादुरगढ़ में 1600 तैराकों का महाकुंभ, मुख्य अतिथि अविनाश चोपड़ा ने की अनिल खत्... How to Deactivate FASTag: पुरानी कार बेच दी है तो तुरंत डिएक्टिवेट करें FASTag, वरना कटता रहेगा आपका...
देश

जिस महिला ने आइटीआइ के लिए सरकार को दी पांच एकड़ जमीन, उन्‍हीं का शव पांच दिन तक पड़ा रहा अस्पताल में

रायपुर। समाज सेविका और प्रधानपाठिका गुणवती बघेल के शव को लेकर आंबेडकर अस्पताल में बड़ी लापरवाही सामने आई है। राजधानी से सटे बंगोली गांव में रहने वाली जिस समाजसेविका ने आइटीआइ खोलने के लिए सरकार को पांच एकड़ जमीन और 40 लाख रुपये दान में दिए थे।
जिसके दान से कई छात्र तकनीकी शिक्षा ले रहे हैं, उस समाजसेविका का शव पांच दिनों तक अंबेडकर अस्पताल की मरच्‍यूरी में पड़ा रहा। तर्क दिया जा रहा है कि जिन्होंने महिला को कोरोना संक्रमण के चलते एडमिट करवाया था, वे जब स्वयं संक्रमित हो गए तब शव लेने अस्पताल नहीं पहुंच पाए।
गांव के तहसीलदार भी संक्रमित होने से शव को नहीं ले जा सके। मामले में मानिकपुरी समाज ने नाराजगी जताई है। इसकी सूचना जब मानिकपुरी पनिका समाज के पदाधिकारियों को मिली, तब उन्होंने कागजी कार्रवाई करके शव हासिल किया और अंतिम संस्कार कराया।
मानिकपुरी समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश मानिकपुरी ने बताया कि समाजसेविका गुणवती बघेल को 20 मार्च को अंबेडकर अस्पताल में एक ग्रामीण तुलसी खुंटे ने भर्ती करवाया था। इलाज के दौरान पांच अप्रैल को महिला की मौत हो गई। जो व्यक्ति महिला को अस्पताल लेकर आया था, उसके घर में शादी होने से वह नहीं आ सका।

गांव के तहसीलदार को सूचना दी गई तो वह भी कोरोना पॉजिटिव होने से अस्पताल नहीं पहुंचे और गांव वालों को पत्र दे दिया। गांव वालों ने रायपुर में रहने वाली बहनों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने आने से इन्‍कार कर दिया। आखिरकार शव को अस्पताल से लेने में महंत उमेश मानिकपुरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टिकरापारा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया।
एक वाहन में चार शव लादकर ले गए श्मशान
अस्पताल में वाहन की कमी होने से चार शव को एक के ऊपर एक रखकर श्मशान घाट तक लाया गया। इसमें समाजसेवी महिला का शव भी था। श्मशान में लकड़ी की कमी के कारण सभी का संस्कार एक साथ किया गया। बताया जाता है कि समाजसेवी महिला ने बिरगांव में ब्लाइंड स्कूल के कमरों का निर्माण भी करवाया था। साथ ही सरकार को आइटीआइ खोलने पांच एकड़ जमीन और 40 लाख रुपये दिए थे। उनकी कोई संतान नहीं थी।

‘हमारी ओर से देरी नहीं की गई है। मृत्यु के बाद प्रशासन को सूचना दे दी गई। जिसके बाद उनके स्वजनों तक जानकारी भेजी जाती है।’

– विनीत जैन, अधीक्षक, अंबेडकर अस्पताल, रायपुर

Related Articles

Back to top button