कोरोना से मृत प्रमाणपत्र न देने से स्वजन सरकारी लाभ से हो रहे वंचित : रुपकुमारी

महासमुंद। जिला भाजपा अध्यक्ष और पूर्व संसदीय सचिव रूपकुमारी चौधरी ने कोरोना संक्रमण से हुई मौतों का प्रमाण पत्र देने में किए जा रहे हीलाहवाली को लेकर प्रदेश सरकार की नीयत और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। चौधरी ने कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिलने के कारण कोरोना मृतकों के स्वजन शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण की रोकथाम और कोरोना में मृत लोगों के परिवार को शासकीय लाभ पहुँचाने की बड़ी-बड़ी डींगें हाँक रही प्रदेश सरकार और उसका प्रशासनिक अमला महीनों बीतने के बाद भी मृत्यु प्रमाण पत्र देने के प्रति संीदा नहीं है। पिथौरा के एक ऐसे ही मामले का क्रि कर चौधरी ने बताया कि वहाँ वार्ड तीन निवासी टेकू साहू की भाभी का 16 अप्रैल को वहां के स्वास्थ्य केंद्र में निधन हुआ था। उनकी जांच रिपोर्ट के मुताबिक़ वे कोरोना संक्रमित थीं। कोविड गाइडलाइन के मुताबिक़ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। बाद में उनके परिवार के नौ सदस्यों की जाँच की गई और वे भी कोरोना पाीटिव पाए गए थे। चौधरी ने बताया कि एक सादी पर्ची में उन्हें कोरोना पाीटिव होना लिखकर दे दिया गया और उसकी आनलाइन एंट्री नहीं की गई थी। इस लापरवाही के चलते अब मृतका के बच्चों को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम शाला में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। मृतका के स्वजनों को बताया गया है कि चूँकि ऑनलाइन एंट्री नहीं हुई है, इसलिए शासन द्वारा दी जा रही सहूलियतों का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा। इस बारे में बीएमओ से संपर्क करने पर उन्होंने भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।
चौधरी ने इसे सरकार और उसके सिस्टम की लापरवाही बताया और कटाक्ष किया कि अब पिथौरा के कांग्रेस पार्षदों द्वारा सरकारी अस्पताल की लापरवाही के ख़िलाफ़ एकजुट होकर आंदोलन करने के एलान से यह साफ़ हो गया हैं कि कोरोना महामारी को लेकर प्रदेश सरकार कितनी लापरवाह और संवेदनहीन हो चली है। जब कांग्रेस से जुड़े लोग ही अपनी सरकार के इंतामात से नारा हैं, तो प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली और नीयत स्वयमेव जगाहिर हो रही है।






