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मुरैना के हेतमपुर की घटना के बाद जागे रेल अफसर, बिलासपुर कोचिंग डिपो में भी सभी एलएचबी कोचों की जांच

बिलासपुर। मुरैना के हेतमपुर रेलवे स्टेशन में उधमपुर- दुर्ग एक्सप्रेस की घटना के बाद बिलासपुर के रेल अफसर भी सकते में हैं। मैकेनिकल व इलेक्ट्रिकल विभाग के अधिकारी शुक्रवार रात से कोचिंग डिपो में पहुंचकर एलएचबी कोचों की जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान वह यह देख रहे हैं कि सभी कोचों में अग्निश्मन यंत्रों की उपलब्धता है या नहीं। यदि है तो कही वैधता समाप्त तो नहीं हो गई है। छुटपुट मिलने पर उसे तत्काल ठीक भी किया जा रहा है।

यह ट्रेन रायपुर रेल मंडल की है, जो दुर्ग से उधमपुर के बीच चलती है। ट्रेन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन की होने के कारण यहां भी हड़कंप मचा हुआ है। उच्चाधिकारियों के साथ- साथ रेलवे बोर्ड स्तर के अधिकारियों की कभी जांच हो सकती है। वैसे भी आग की मुख्य वजह शार्ट सर्किट है। इसी से निकली चिंगारी ने दो कोच को जलाकर खाक दिया।

घटना के दौरान एक बड़ी खामी यह भी सामने आई कि कोच में उपलब्ध आग बुझाने वाला यंत्र काम ही नहीं कर रहा था। कुछ की वैधता तक समाप्त हो चुकी थी। हालांकि रेलवे इससे इंकार कर रही है। पर घटना के दौरान ट्रेन में मौजूद यात्रियों ने इसे उजागर किया है। बिलासपुर रेल मंडल दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन अंतर्गत ही आता है।

यही वजह है कि शुक्रवार की रात से शनिवार को दिनभर कोचिंग डिपो में मैकेनिकल व इलेक्ट्रिक विभाग के अफसरों की मौजूदगी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि दोनों विभाग कोचिंग डिपो में खड़ी एलएचबी कोच वाली रैक का ही जायजा ले रहे हैं। जांच के प्रमुख बिंदु बिजली तार समेत अन्य इलेक्ट्रिक उपकरण की स्थिति और अग्निश्मन यंत्र की उपलब्धता है।

यंत्र की वैधता की बारीकी से जांच की जा रही है। मालूम हो कि बिलासपुर रेल मंडल के पास 155 से अधिक एलएचबी कोच है। जिनसे रैक बनाकर अलग- अलग ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। शार्ट सर्किट की घटनाएं अभी सबसे ज्यादा एलएचबी कोच में ही हो रही है।

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