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उत्तरप्रदेश

गुणवत्तापरख शिक्षा के अभाव में कोई छात्र आइएएस तो दूर, पीसीएस अफसर तक नहीं बना

अलीगढ़ । 2009 में मुख्यमंत्री रहीं मायावती ने शिक्षा से वंचित अनुसूचित जाति व जनजाति के गरीब छात्र-छात्राओं के लिए प्रदेशभर में प्रशिक्षण केंद्र खोले थे। इनमें अलीगढ़ का भी शामिल था। इसमें आइएएस-पीसीएस परीक्षा के लिए तैयारी कराई जाती है। केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग पर है। यहां छात्रों को मुफ्त कोचिंग के साथ कापी किताब, रहने व खाने की सुविधा भी मिलती है। पांच महीने का एक सत्र होता है। एक सत्र की क्षमता 200 छात्रों की है। एक साल में दो सत्र होते हैं।
बसपा सरकार ने 2009 में आगरा रोड पर डॉ. भीमराव आंबेडकर आईएएस-पीसीएस पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की थी। इसका मकसद अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्र-छात्राओं को आइएएस-पीसीएस परीक्षा के लिए तैयार करना था। केंद्र को शुरुआत हुए 13 साल हो चुके हैं और इस पर करीब 11 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। गुणवत्तापरख शिक्षा के अभाव में यहां कोई छात्र आइएएस तो दूर, पीसीएस अफसर तक नहीं बन सका है। केंद्र पर न तो पूरा स्टाफ है और न ही बेहतर अध्यापक। अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं हैं। जिम्मेदार अफसर भी बजट को ठिकाने लगाकर खानापूर्ति कर देते हैं।
केंद्र के निर्माण पर तीन-चार करोड़ रुपये खर्च
अधिकारियों की मानें तो केंद्र के निर्माण पर तीन-चार करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद हर साल इसके संचालन पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। पहले एक साल में 60-70 लाख रुपये खर्च होते थे। अब कुछ सालों से खर्च घटाकर 20 से 25 लाख रुपये कर दिया गया है। शुरू से अब तक इस पर करीब 11 करोड़ खर्च हो चुके हैं।
सिविल सेवा परीक्षा में कोई पास नहीं हो सका
केंद्र में अब तक 2200 से अधिक छात्र प्रशिक्षण ले चुके हैं। इनमें से कुछ ने लेखपाल, पुलिस, रेलवे कर्मचारी समेत अन्य पदों पर तो सफलता पाई है, लेकिन सिविल सेवा परीक्षा में कोई पास नहीं हो सका है।
100 में से 90 ने कराई काउंसलिग
200 की क्षमता वाले केंद्र में इस बार 100 छात्रों का कोचिंग के लिए चयन हुआ है। इनमें से 90 ने ही काउंसिलिंग कराई है। जल्द कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। केंद्र में छात्र-छात्राओं को केवल वही प्रशिक्षण दे सकता है, जिसने आइएएस की मुख्य परीक्षा दी हो। प्रशिक्षक को एक लेक्चर के 500 रुपये मिलते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला समाज कल्याण अधिकारी सूरज कुमारी का कहना है कि 13 साल से प्रशिक्षण केंद्र का संचालन हो रहा है। परीक्षा के बाद ही प्रशिक्षण के लिए छात्रों का चयन होता है। बेहतर प्रशिक्षण देने का प्रयास रहता है। 14 अध्यापकों को चयन हुआ है। 90 छात्रों ने काउंसिलिंग कराई है।

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