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अब दिग्गज कंपनी BSNL का भी हो रहा है निजीकरण, सरकार ने दी जानकारी

नई दिल्ली: बीएसएनएल पर आखिरकार सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है. घाटे में चल रही सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनल (BSNL) की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर सरकार अभी कोई प्लान नहीं कर रही है. केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के विनिवेश पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है. टेलीकॉम मिनस्ट्री की तरफ से संसद में यह जानकारी दी गई है.

राज्य मंत्री ने दी जानकारी

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में टेलीकॉम राज्य मंत्री देवुसिंह चौहान ने बताया कि बीएसएनएल के विनिवेश की पर अभी कोई प्लान नहीं है. डीएमके सांसद डीएम कथिर आनंद ने सरकार से पूछा था कि क्या विनिवेश के लिए बीएसएनएल की संपत्ति को ध्यान में रखा जाएगा? इसके जवाब में राज्य मंत्री ने इस पर विचार से साफ मना कर दिया.

अचल संपत्तियों का है ये डेटा

इतना ही नहीं संसद में डीएमके सांसद ने टेलीकॉम मिनिस्ट्री से भवन, जमीन, टावर और टेलीकॉम इक्विपमेंट समेत देशभर में इस सरकारी कंपनी की मौजूद अचल संपत्तियों का भी डेटा मांगा था. इसके बाद मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, देशभर के सभी सर्किलों में बीएसएनएल के 3,266 बिल्डिंग, 1,388 टेलीकॉम टावर और सैटेलाइट, 21,042 दूससंचार उपकरण और 686 गैर दूरसंचार उपकरण हैं.

लगातार बढ़ रहा है बीएसएनएल का घाटा

आपको बता दें कि देश की दिग्गज टेलीकॉम कंपिनयों में शुमार रही बीएसएनएल का घाटा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ जा रहा है. वित्त वर्ष 2020-21 वर्ष में बीएसएनल का पूरा घाटा 7,441.11 करोड़ रुपये रहा था. वहीं, पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में 15,499.58 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था जबकि वित्त वर्ष 2018-19 में 15,000 करोड़ रुपये था. इसके पहले वित्त वर्ष 2017-18 में कंपनी ने 7,993 करोड़ रुपये हुआ था. कंपनी के बढ़ते घाटे और कारोबार में कमी को देखते हुए कंपनी वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) की पेशकश थी. BSNL के 78,569 कर्मचारियों ने VRS ले लिया, जिसकी वजह से 2020-21 में घाटे में कमी आई.

कंपनी कर्ज में भी हो रही बढ़ोतरी

गौरतलब है कि बीएसएनएल कंपनी के कर्ज में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. पिछले वित्त वर्ष (2020-21) में भी कंपनी के ऊपर 27,033.6 करोड़ रुपये का कर्ज था. जबकि यह 2019-20 में 21,674.74 करोड़ रुपये रहा था. वहीं, कंपनी की कुल संपत्ति भी 59,139.82 करोड़ रुपये से घटकर 51,686.8 करोड़ रुपये रह गई है. यानी कंपनी लगातार बड़े घाटे में जा रही है.

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