370 पर मोदी ने विपक्ष को घेरा, कहा- इन्हें चिंता कि हम मेहनत क्यों कर रहे हैं

परलीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इनके अधिकतर नेता आज आपस में एक दूसरे से निपटने और स्वार्थसिद्धि में लगे हैं । पीएम मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की चुनाव सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इनके गठबंधन (युति) में जो युवा नेता थे वे भी साथ छोड़ रहे हैं और वरिष्ठ नेता हताश-निराश हैं। आज अगर उनके महागठबंधन (महायुति) के पक्ष में माहौल है तो इसके पीछे बीते पांच वर्ष की कार्यशक्ति है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं की स्वार्थशक्ति है ।
उन्होंने कहा, ‘‘विरोधी दल के नेताओं को को चिंता हो रही है कि भाजपा के कार्यकर्ता इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं । मैं आज बीड से उनको बता दूं कि, भाजपा के पास लगन से कार्य करनेवाले कार्यकर्ता हैं, तभी वो दिलों को जीतते हैं और दलों को जिताते हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले पर एक ने कहा था कि यह किसी की हत्या करने जैसा है। एक नेता ने कहा कि यह भारत की राजनीति का काला दिन है। एक नेता ने कहा कि ये लोकतंत्र के खिलाफ है, एक और बड़े नेता ने कहा कि भारत में लोकतंत्र खत्म हो गया है । एक और नेता ने कहा कि इस फैसले से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। ये हमारे विरोधियों की भाषा है।
मोदी ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 का विरोध उस दिन से करते आ रहे थे जिस दिन से हमारी पार्टी का जन्म हुआ था। इतिहास में जब भी 370 की चर्चा होगी तो देशहित में किए निर्णय को विरोध करने वालों का, उनके बयानों का जिक्र जरुर होगा। देश की एकता-अखंडता में कांग्रेस को हिन्दू मुसलमान नजर आता है। कांग्रेस कहती है कि कश्मीर का मुद्दा भारत का अंदरुनी मामला नहीं है। कांग्रेस के एक और नेता ने कहा कि यह देश को बर्बाद करने वाला फैसला है। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे बयान देने वालों को आप माफ करेंगे ।
मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन शुरु किया है। इसके तहत आने वाले पांच वर्षों में सिर्फ पानी के लिए साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पानी के लिए इतना गंभीर प्रयास भारत में तो क्या विश्व के इतिहस में भी नहीं हुआ होगा । महाराष्ट्र में भाजपा ने 2022 तक हर घर जल पहुंचाने का संकल्प लिया है। यह संकल्प ऐसे ही नहीं लिया गया, इसके पीछे महाराष्ट्र सरकार के बीते पांच वर्षों का ट्रैक रिकॉर्ड भी है ।






