ब्रेकिंग
केरल के कोच्चि में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी कॉकरोच जनता पार्टी, मुख्य चुना... आरा में रिटायर्ड कस्टम अधिकारी हत्याकांड का मुख्य शूटर मुठभेड़ में घायल, पुलिस ने पैर में मारी गोली झारखंड के खूंटी में दिल दहला देने वाला सड़क हादसा— तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर खड़े लोगों को कुचल, 10... महाराष्ट्र के जलगांव में एसीबी का बड़ा एक्शन— 10 हजार की घूस लेते पकड़ा गया अधिकारी, घर और लॉकर से न... देश के मौसम का हाल, उत्तर भारत में बढ़ी ठंड और दक्षिण के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भिंड में कमरे का फर्श धंसने से पलंग समेत 16 फीट गहरे गड्ढे में समाई महिला, सिंधिया रियासत के दौर से ... दिल्ली में दिवाली से पहले ही हवा हुई बेहद जहरीली, कई इलाकों में एक्यूआई 450 के पार— गंभीर श्रेणी में... या एसी, टीवी या फ्रिज खरीदते समय क्या एक्सटेंडेड वारंटी लेना सच में फायदेमंद है? जानिए इसके फायदे और... मुंबई के कांदिवली में बुजुर्ग महिला के साथ लूट, परिचित बनकर आया बदमाश गले से सोने की चेन छीनकर फरार उत्तरकाशी के केदारताल एवलांच में जान गंवाने वाली लखनऊ की दो सगी बहनों की दर्दनाक दास्तान, अंतिम सांस...
राजस्थान

हड़ताली डॉक्टरों और गहलोत सरकार के बीच वार्ता विफल

राजस्थान में निजी डॉक्टर 28 मार्च को राज्य विधानसभा में पारित विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विधेयक के अनुसार, राज्य के प्रत्येक निवासी को किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान और निजी संस्थान में पूर्व भुगतान के बिना आपातकालीन उपचार और देखभाल का अधिकार होगा।

राजस्थान में गहलोत सरकार राइट टू हेल्थ बिल लेकर आई है जिसके बाद से ही डॉक्टर्स और सरकार के बीच काफी तनातनी है। अपनी मांगो को लेकर सड़कों पर उतरे निजी डॉक्टर्स झुकने को तैयार नहीं हैं वहीं दूसरी तरफ सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी हालात में बिल वापस नहीं होगा, जो डॉक्टरों की मांगे हैं उनको बिल में डाल दिया जाएगा। इस बीच विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर हड़ताली डॉक्टरों और राजस्थान सरकार के बीच सोमवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही।

निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम सोसायटी के सचिव विजय कपूर के नेतृत्व में डॉक्टरों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विधेयक पर गतिरोध को दूर करने और लोगों को उचित चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की लेकिन बैठक में इस मसले का कोई ठोस हल नहीं निकला।

राजस्थान में निजी डॉक्टर 28 मार्च को राज्य विधानसभा में पारित विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विधेयक के अनुसार, राज्य के प्रत्येक निवासी को किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान और निजी संस्थान में पूर्व भुगतान के बिना आपातकालीन उपचार और देखभाल का अधिकार होगा।

डॉक्टरों का कहना है कि यह बिल हमारे लिए बहुत घातक है। उनका मानना है कि इस बिल से डॉक्टर्स और मरीजों के बीच और अधिक झगड़े बढ़ेंगे। अभी तक मरीज और डॉक्टर्स के बीच जमीनी स्तर पर सामंजस्य नहीं बैठ सकेगा, इसलिए बिल का विरोध है।

कपूर ने एक बयान में कहा कि विधेयक के विरोध में राज्यव्यापी पूर्ण चिकित्सा बंद सोमवार को 16वें दिन भी जारी रहा। जेएमए सभागार में अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में चिकित्सक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आंदोलन का समर्थन करते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार से डॉक्टरों की जायज मांगों को स्वीकार करने और इस गतिरोध को तुरंत समाप्त करने का आग्रह किया।

 

Related Articles

Back to top button