आज होगा उद्धव सरकार का शक्ति परीक्षण, 170 विधायकों के समर्थन का दावा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र (Maharashtra) में उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) सरकार का आज 2 बजे शक्ति परीक्षण होगा। जिसमें यह तय हो जाएगा कि सरकार गठन के लिये जरुरी बहुमत का जो दावा नए गठबंधन ‘महा विकास अघाड़ी’ ने किया है वो कितना सही है। हालांकि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने नई सरकार को 3 दिसंबर तक बहुमत सिद्ध करने का समय दिया था लेकिन उद्धव ठाकरे ने आज ही शक्ति परीक्षण करने का फैसला किया है।
उद्धव ठाकरे को हैं 170 विधायकों का समर्थन
राज्य में शिवसेना के नेतृत्व में बनी नई सरकार का दावा है कि उनके पास 170 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। जिसमें राज्यपाल को दिये पत्र में 164 विधायकों का हस्ताक्षर था। तीनों दलों शिवसेना 56 सीट,एनसीपी 54 और कांग्रेस को 44 सीटें विधानसभा चुनाव परिणाम में प्राप्त हुए थे। अगर इन तीनों दलों के सीटों को जोड़ दिया जाए तो 154 सीटें होती है। जो 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिये जरुरी आंकड़े 145 से 9 ज्यादा है। जिससे उद्धव सरकार बहुत ही आसानी से विधानसभा में floor test को प्राप्त कर जाएगी।
महीने भर तक चली राजनीतिक नूरा कुश्ती के बाद बनी है सरकार
मालूम हो कि राज्य में लगभग 1 महीने तक जारी उठापटक के बाद ही उद्धव टाकरे के नेतृत्व में सरकार बनी है। इससे पहले बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन टूटने से ही उद्धव ठाकरे ने महा विकास अघाड़ी के साथ जाना तय किया था। शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार का गठन किया है। उद्धव ठाकरे ने अपने पहवे केबिनेट के बैठक में छत्रपति शिवाजी के राजधानी रायगढ़ के लिये 20 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है। इसके साथ ही उद्धव ने आरे में मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकने का भी निर्णय लिया है। राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को सीएम कार्यालय जाकर विधिवत रुप से अपना कार्यभार संभाल लिया है। D
कांग्रेस ने डिप्टी सीएम पद की मांग रखकर बढ़ाई उद्धव सरकार की मुश्किलें
वहीं महाराष्ट्र (Maharashta) में उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) सरकार को अभी कई चुनौतियों से पार करना है। जिसमें सबसे पहले शक्ति परीक्षण से ही गुजरना होगा, लेकिन उनकी सरकार की मुश्किलें यहीं खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है, सहयोगी कांग्रेस (Congress) ने भी डिप्टी सीएम पद पर दावा ठोक दिया है।जिससे शिवसेना (Shivsena) असहज हो गई है। एनसीपी (NCP) ने पहले ही डिप्टी सीएम पद के लिये अपनी दावेदारी पेश की थी। तीनों दलों के बीच हुए सहमति के आधार पर ही यह तय हुआ था कि कांग्रेस को विधानसभा स्पीकर का पद तथा एनसीपी को डिप्टी सीएम का पद देने पर देने की बात हुई थी।





