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Aadhaar के बिना नहीं खरीद पाएंगे सोना-चांदी! सरकार ला सकती है नए निय

मनी लांड्रिंग और काले धन पर लगाम कसने के लिए सरकार जल्द ही सोने-चांदी की बड़ी खरीदारी के लिए पैन की बजाय आधार नंबर को अनिवार्य बना सकती है। इस संबंध में वित्त मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार हो रहा है। वित्त मंत्रालय कई विकल्पों पर विचार कर रहा है जिसमें आधार या अन्य आई.डी. प्रूफ  भी शामिल हो सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार पैन नंबर के स्थान पर आधार नंबर को प्राथमिकता दी जा रही है।

नवम्बर 2019 में नोटबंदी और जुलाई 2017 में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जी.एस.टी.) लागू होने के बाद सरकार सभी वाणिज्यिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके बावजूद वाणिज्यिक गतिविधियों के संबंध में लागू नियमों की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में कई ज्वैलरी सौदों में पैन नंबर के गलत इस्तेमाल के बाद ऐसे सौदों के लिए आधार नंबर को ओ.टी.पी. वैरीफिकेशन के साथ अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। जुलाई 2019 में पेश किए गए बजट में सोना-चांदी पर आयात शुल्क को 10 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया गया है। इसका ज्वैलर्स ने विरोध किया था जिसका परिणाम यह निकला कि सोना-चांदी की तस्करी बढ़ गई है।

गोल्ड ई.टी.एफ. ने निवेशकों को किया मालामाल
सोने में निवेश परंपरागत रूप से आकर्षक रहा है। पिछले साल स्वर्ण एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (गोल्ड ई.टी.एफ.) ने 41 प्रतिशत तक रिटर्न के साथ सोने में सीधे निवेश को भी पीछे छोड़ दिया है। सोने में पिछले साल निवेशकों को 28 प्रतिशत रिटर्न मिला है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि निवेश में विविधता और उस पर जोखिम घटाने के लिए एक तय मात्रा में सोने में निवेश आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। सोने को शेयरों की तरह खरीदने की सुविधा को गोल्ड ई.टी.एफ .कहते हैं। यह म्यूचुअल फंड की स्कीम है। इसमें सोने की खरीद यूनिट में की जाती है। इसे बेचने पर आपको सोना नहीं बल्कि उस समय के बाजार मूल्य के बराबर राशि मिलती है। यह सोने में निवेश के सबसे सस्ते विकल्पों में से एक है। इसकी खरीद यूनिट में की जाती है।

आमतौर पर ई.टी.एफ. के लिए डीमैट खाता जरूरी होता है। म्यूचुअल फंड कम्पनी डी.एस.पी. ब्लैक रॉक और कोटक वल्र्ड गोल्ड के गोल्ड ई.टी.एफ . ने पिछले साल सबसे अधिक रिटर्न दिया है। कोटक वल्र्ड गोल्ड में निवेशकों को 41 प्रतिशत रिटर्न मिला है, जबकि डी.एस.पी. ब्लैक रॉक में एक साल में 35 प्रतिशत रिटर्न मिला है। हालांकि वर्ष 2015 में इन दोनों कम्पनियों के गोल्ड ई.टी.एफ .में निवेशकों को तगड़ा नुक्सान हुआ था। उस समय कोटक वल्र्ड गोल्ड में 24 और डी.एस.पी. ब्लैक रॉक में 18 प्रतिशत का नुक्सान हुआ था। शेयरों की तरह बेचने की सुविधा की वजह से जरूरत पडऩे पर किसी भी कारोबारी दिन इसे बेच सकते हैं। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि ज्वैलरी में निवेश करने की बजाय गोल्ड ई.टी.एफ . में निवेश ज्यादा फायदेमंद है। गोल्ड ई.टी.एफ . में रखरखाव शुल्क कम है और 3 साल बाद बेचने पर लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ कर लगता है जिससे टैक्स बचत होती है। वहीं सोने को बेचने पर 30 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज का नुक्सान होता है।

अभी 2 लाख रुपए से ज्यादा का सोना-चांदी खरीदने के लिए पैन जरूरी
ब्लैक मनी और मनी लांङ्क्षड्रग पर लगाम लगाने के लिए सरकार अगस्त 2017 में 50,000 रुपए से ज्यादा की ज्वैलरी सौदों को पी.एम.एल.ए. एक्ट के तहत लाई थी लेकिन तकनीकी कारणों से इसे खत्म कर दिया था। मौजूदा समय में 2 लाख रुपए से ज्यादा की सोना-चांदी की ज्वैलरी खरीदने के लिए पैन नंबर देना अनिवार्य है। हालांकि ज्वैलर लंबे समय से इस सीमा का विरोध कर रहे हैं। ज्वैलर्स का कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 5 लाख किया जाए।

नए नियम से आम लोगों को होगी समस्या
दिल्ली सर्राफा बाजार एसोसिएशन के प्रधान विमल गोयल ने कहा कि नए नियम से आम लोगों को समस्याओं का सामना करना होगा। गोयल का कहना है कि भारत एक परंपराओं वाला देश है और यहां बेटी की शादी पर सामान्य तौर पर 2 लाख रुपए तक की ज्वैलरी दी जाती है। यदि यह नियम बनता है तो आम लोगों को इसके लिए आधार नंबर देना होगा।

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