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छत्तीसगढ़

Dantewada Wildlife Smuggling: दंतेवाड़ा में बाघ-तेंदुए की खाल बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह के 4 सदस्य गिरफ्तार; वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

दंतेवाड़ा: दंतेवाड़ा वनमंडलाधिकारी के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने न केवल बाघ की खाल के साथ दो आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया, बल्कि सघन पूछताछ के बाद एक बड़े तस्कर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तेंदुए की खाल सहित अन्य आरोपियों को भी दबोच लिया.

बाघ की खाल के साथ दो आरोपी गिरफ्तार

दंतेवाड़ा से बालूद मार्ग पर वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ लोग बाघ की खाल की तस्करी के लिए सक्रिय हैं. सूचना को गंभीरता से लेते हुए वनमंडल दंतेवाड़ा, वनमंडल बीजापुर, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बस्तर वनमंडल, राज्य स्तरीय उड़न दस्ता दल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की. कार्रवाई के दौरान दो संदिग्ध आरोपियों को बाघ की खाल के साथ गिरफ्तार किया गया.

तेंदुए की खाल के साथ गिरोह के अन्य आरोपी अरेस्ट

गिरफ्तार आरोपियों से जब सघन पूछताछ की गई तो उन्होंने इस अवैध नेटवर्क में शामिल अन्य साथियों के नाम उजागर किए. इसके बाद वन विभाग ने तेजी से कार्रवाई करते हुए गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू की.

पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर वन विभाग की विशेष टीम ने ग्राम केशापुर में छापेमारी की. इस दौरान आरोपियों की निशानदेही पर एक अन्य ठिकाने से तेंदुए की खाल बरामद की गई. इस कार्रवाई में मासो ओयाम (50 वर्ष) और अर्जुन भोगामी (42 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया. इस प्रकार कुल मिलाकर वन विभाग ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है.

मुख्य आरोपियों में लक्ष्मण तेलाम (51 वर्ष), देवीराम ओयाम (58 वर्ष), रमेश कुड़ियाम (24 वर्ष), फरसोन पोयामी (27 वर्ष), सेमला रमेश (24 वर्ष), सुखराम पोड़ियाम (21 वर्ष) और छन्नू कुड़ियाम (35 वर्ष) शामिल हैं.

अवैध शिकार और तस्करी पर कड़ी कार्रवाई

वनमंडलाधिकारी रंगनाथन रामा ने बताया कि बरामद किए गए दोनों वन्य प्राणी बाघ और तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत अत्यंत संरक्षित श्रेणी में आते हैं. इनका शिकार, व्यापार या इनके अंगों की तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.

अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं—धारा 9, धारा 39(1)(घ), धारा 3(क)(ख)(ग), धारा 48 तथा संशोधित अधिनियम 2022 की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है. वन विभाग ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर जेल भेज दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य जिलों या राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी गहन जांच जारी है.

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