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Bengal Election 2026: रायगंज, मालदा और मुर्शिदाबाद में आज राहुल गांधी की हुंकार; जानें कांग्रेस के इन गढ़ों का पूरा सियासी समीकरण

केरल और असम में चुनाव के बाद चुनावी हलचल अब पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में बढ़ गई है. देश के बड़े नेता ताबड़तोड़ यहां चुनावी रैली करने में लगे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी आज मंगलवार को पश्चिम बंगाल में 3 चुनावी जनसभा करने जा रहे हैं. पार्टी इस बार राज्य में अकेले ही चुनाव लड़ रही है और उसकी यही कोशिश रहेगी कि इस बार न सिर्फ खाता खोला जाए बल्कि सम्मानजनक संख्या में सीटें हासिल कर ली जाए.

साल 2021 का चुनाव कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं रहा था. वाम मोर्चा के साथ लगातार दूसरी बार कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरी तो संयुक्त मोर्चा नाम के इस गठबंधन को हर जगह झटकों का सामना करना पड़ा क्योंकि गठबंधन का खाता तक नहीं खुल सका था. उसे राज्य में कुल पड़े वोटों का 8.7 फीसदी वोट मिले लेकिन ये वोट गठबंधन को एक भी सीट दिला पाने में नाकाफी साबित हुए.

अपना गढ़ फिर से वापस पाने की कवायद

एक समय कांग्रेस और वाम दलों का यहां दबदबा हुआ करता था. लेकिन आज ये दल सत्ता की पहुंच से भी दूर हैं. पिछले चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाए थे. कांग्रेस इस बार सटीक रणनीति से चुनाव मैदान में उतर रही है, कहा जा रहा है कि पार्टी ने व्यवस्थित तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी की है. टिकट बंटवारे में जातिगत और राजनीतिक समीकरण का भी खास ख्याल रखा गया है. राहुल गांधी अब चुनाव प्रचार के जरिए वोटर्स को अपने अंदाज में साधने की कोशिश करेंगे.

कांग्रेस की नजर सत्ता के शिखर पर पहुंचने की जगह अपनी स्थिति सुधारने पर लगी होगी. उसे अब 0 से शुरुआत करनी होगी. ऐसे में पार्टी उन क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रही है जहां उसके लिए सुधार की ज्यादा गुंजाइश दिख रही है. राहुल की आज उत्तरी दिनाजपुर जिले के रायगंज क्षेत्र में चुनावी सभा, इसके बाद वह मालदा जिले में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. फिर वह मुर्शिदाबाद में भी एक जनसभा को संबोधित करेंगे.

कभी कांग्रेस का गढ़ था उत्तरी दिनाजपुर

राहुल गांधी की पहली रैली उत्तरी बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के रायगंज में है. कभी इस जिले में कांग्रेस और वाम दलों का दबदबा हुआ करता था. इसमें कांग्रेस अच्छी स्थिति में हुआ करती थी. 2021 में यहां पर ममता की पार्टी ने 9 में से 7 सीटों पर जीत हासिल की थी तो 2 सीटों पर बीजेपी को जीत मिली. जबकि कांग्रेस-वाम मोर्चा को 5 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था.

लेकिन 2016 के चुनाव में उत्तरी दिनाजपुर की 9 विधानसभा सीटों में कांग्रेस-वाम गठबंधन ने 9 में से 5 सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां की रायगंज सीट समेत 3 सीटों पर कांग्रेस तो 2 सीटों पर वाम दलों को जीत मिली. इसी तरह 2011 के चुनाव में भी ममता बनर्जी अपनी तृणमूल कांग्रेस के साथ पहली बार मैदान में उतरी थी और पार्टी ने राज्य में बड़ी जीत जरूर हासिल की.

मुस्लिम बहुल मालदा में कांग्रेस की नई कोशिश

लेकिन कांग्रेस ने इस जिले की 9 में से 5 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे और रानीजंग समेत 3 सीट उसके खाते में गई थी, जबकि 3 सीट वाम दलों के पक्ष में तो एक सीट निर्दलीय के पास गई. टीएमसी को 2 सीट मिली थी. इस चुनाव में टीएमसी और कांग्रेस यूपीए गठबंधन के तहत साथ चुनाव लड़े थे.

उत्तरी दिनाजपुर की तरह मालदा भी इसी क्षेत्र में पड़ता है. अपने आम की मिठास की वजह से मशहूर मालदा जिले में भी कांग्रेस अपनी पुरानी स्थिति पाने की जुगत में लगी है. 2021 वाले चुनाव में मुस्लिम बहुल मालदा की 12 में से 8 सीटें टीएमसी के खाते में तो 4 सीटों पर बीजेपी का कब्जा हुआ था. बीजेपी का क्षेत्र में अब तक का यह बेहद शानदार प्रदर्शन था.

संयुक्त मोर्चा ने 2016 में 12 में से 11 सीटों जीत हासिल की. 11 में से 8 सीट कांग्रेस के खाते में आई थी लेकिन 5 साल बाद यह संख्या 0 पर ही अटक गई.

अधीर के जरिए मुर्शिदाबाद में पैठ बनाने की कोशिश

राहुल गांधी की तीसरी रैली दक्षिण बंगाल में पड़ने वाले मुर्शिदाबाद जिले में है. इस बार के चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद लगातार चर्चा में है. वोटर लिस्ट को लेकर यह शहर काफी विवादों में रहा. अब राहुल यहां पर अपने वोटर्स में साधने में जुटे हैं. जिले में विधानसभा की 22 सीटें आती हैं जिसमें 2021 में यहां पर टीएमसी ने गजब का प्रदर्शन किया और 16 सीटों के सुधार के साथ 22 में से 20 सीटों पर कब्जा जमा लिया. बीजेपी के खाते में 2 सीटें ही गईं. कांग्रेस को इस जिले में भी मायूस होना पड़ा.

साल 2016 में कांग्रेस के लिए मुर्शिदाबाद में भी स्थिति बहुत अच्छी रही थी और 22 में से 14 सीटों पर अपनी जीत हासिल की थी. लेकिन 2021 में यह 0 पर आकर खत्म हो गया. 2011 में भी कांग्रेस को 14 सीटों पर जीत मिली थी. मुर्शिदाबाद ने कांग्रेस ने अपने बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी को उतारा है. वह लंबे समय बाद विधानसभा चुनाव (बहरामपुर सीट) लड़ रहे हैं.

साल 2011 में ममता के उभार के साथ-साथ कांग्रेस की स्थिति गिरती चली गई. यही हाल वाम दलों का भी रहा. दोनों दल आज सत्ता की रेस से कहीं दूर हैं. हालांकि कांग्रेस अब वापसी की तैयारी में लग गई है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी को फिर से खड़ा करने की जुगत में लगे हैं. राज्य में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य खिलाड़ी बनने के बाद कांग्रेस क्या खुद को तीसरे नंबर की पार्टी बनाने में कामयाब हो पाएगी.

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