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Maratha Reservation News: मनोज जरांगे ने तोड़ा अनशन; 12 सूत्री प्रस्ताव पर सरकार और मराठा नेताओं में बनी सहमति

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधियों से लंबी बातचीत के बाद अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया है। सरकार की ओर से पेश किए गए 12 सूत्री प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद जरांगे ने यह निर्णय लिया। शनिवार को जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में शुरू हुआ यह अनशन पिछले तीन सालों में उनका नौवां अनशन था।

📜 12 सूत्री प्रस्ताव और सरकारी सहमति

मनोज जरांगे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बताया कि राज्य सरकार 58 लाख पहले से चिन्हित ‘कुनबी रिकॉर्ड’ के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने के लिए तैयार हो गई है। जरांगे के अनुसार, ये दस्तावेज ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे और इनका क्रियान्वयन संभागीय आयुक्त कार्यालय की देखरेख में होगा। उन्होंने मांग की है कि जिन अधिकारियों के पास वैध रिकॉर्ड होने के बावजूद प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हुई, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

⚖️ अलग मंत्रालय और समीक्षा की प्रक्रिया

जरांगे ने आरक्षण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कई अन्य मांगों पर भी जोर दिया:

  • समीक्षा: सरकार 15 दिनों के बाद जाति वैधता प्रमाण पत्र प्रक्रिया की समीक्षा करेगी।

  • अलग मंत्रालय: मराठा और कुनबी समुदाय के उत्थान के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग का समर्थन जारी रहेगा।

  • आर्थिक सहायता: आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले परिवारों को 15 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाएगा।

🤒 बिगड़ती तबीयत और संघर्ष

भीषण गर्मी में बिना किसी छांव या टेंट के खुले मैदान में अनशन पर बैठने के कारण मनोज जरांगे की तबीयत काफी बिगड़ गई थी। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें बार-बार उल्टी, लो ब्लड प्रेशर और डिहाइड्रेशन की समस्या हो गई थी। उनकी स्वास्थ्य जांच के लिए उन्हें छत्रपति संभाजीनगर के अस्पताल ले जाया जाएगा। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के नेतृत्व में सरकारी टीम ने मौके पर पहुंचकर उनसे बातचीत की और आंदोलन समाप्त करने की अपील की।

🔄 लंबे समय से जारी है मराठा आरक्षण की मांग

मनोज जरांगे पिछले कई महीनों से मराठा समुदाय के लोगों को ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए कुनबी जाति प्रमाण पत्र, हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड लागू करने और आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले भी वे मुंबई के आजाद मैदान और अंतरवाली सराटी में अपने आंदोलनों के जरिए सुर्खियों में रह चुके हैं। सरकार का कहना है कि वे इस मुद्दे को सकारात्मक रूप से सुलझाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

संपादकीय टिप्पणी: आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति का एक अत्यंत संवेदनशील विषय रहा है। क्या आपको लगता है कि कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने की यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रहे मराठा आरक्षण के विवाद को स्थाई रूप से समाप्त कर पाएगी? अपने विचार नीचे साझा करें।

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