Rubella Outbreak Alert: जर्मन खसरा (रूबेला) की दस्तक से झारखंड में हड़कंप; रांची NHM में बना वार रूम, टीकाकरण अभियान शुरू

रांची। झारखंड में रूबेला वायरस (जर्मन खसरा) का इस सीजन का पहला मामला सामने आते ही राज्य का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड की रहने वाली एक 10 वर्षीय बच्ची रूबेला वायरस से संक्रमित पाई गई है। रिम्स (RIMS) रांची के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा बच्ची के ब्लड सैंपल की जांच के बाद इस संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि की गई है। इसके साथ ही राज्यभर में संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
🚨 रांची NHM में बना राज्यस्तरीय वार रूम: पूरे प्रदेश में विशेष टीकाकरण अभियान शुरू
रूबेला वायरस को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने और इसके रोकथाम व उपचार के लिए राज्य स्तर पर विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
रांची स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मुख्यालय में एक विशेष ‘राज्यस्तरीय वार रूम’ का गठन किया गया है। इसके साथ ही पूरे झारखंड में मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान का संचालन शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग सिमडेगा और आसपास के इलाकों में अन्य एक्टिव केसों और संदिग्धों की पहचान में जुट गया है, ताकि समय रहते वायरस के प्रसार को रोका जा सके।
💉 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को लगेगी खुराक: छूटे हुए बच्चों पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य विभाग ने 9 माह से लेकर 5 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को चिह्नित कर मीजल्स-रूबेला (MR) का टीका लगाने के निर्देश दिए हैं।
इस अभियान के तहत ऐसे बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है जिन्हें अब तक एक भी खुराक नहीं मिली है, उन्हें दोनों डोज दिए जाएंगे। वहीं, जिन बच्चों की दूसरी खुराक (Second Dose) लंबित है, उन्हें तुरंत दूसरा टीका लगाकर प्रतिरक्षित किया जाएगा।
🩺 कैसे होती है रूबेला की पहचान? जानिए क्या हैं इसके प्रमुख लक्षण
रूबेला (जर्मन खसरा) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या हवा के माध्यम से फैलती है।
इसके मुख्य लक्षण निम्न हैं:
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कानों के पीछे से शुरू होकर चेहरे और शरीर पर फैलने वाले गुलाबी या लाल दाने/चकत्ते
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100 से 102 डिग्री तक का तेज बुखार
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सिरदर्द, आंखों में लालिमा और जोड़ों में दर्द
⚠️ गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक: जानें बचाव के जरूरी उपाय
रूबेला का संक्रमण आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो सकता है।
गर्भावस्था के दौरान संक्रमण होने पर नवजात शिशु में ‘जन्मजात रूबेला सिंड्रोम’ (Congenital Rubella Syndrome) का गंभीर खतरा रहता है, जिससे बच्चे में शारीरिक या मानसिक विकलांगता हो सकती है।
बचाव और सावधानी के तरीके:
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समय पर टीकाकरण: मीजल्स-रूबेला (MR) की वैक्सीन ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है।
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आइसोलेशन: संक्रमित मरीज को अलग कमरे में रखें।
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मास्क और स्वच्छता: मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें और हाथों को बार-बार साबुन से धोएं।
बता दें कि वर्ष 2022 में कोरोना काल के बाद भी झारखंड के लगभग एक दर्जन जिलों में खसरे का प्रकोप देखा गया था, जिसके बाद व्यापक स्तर पर सघन टीकाकरण अभियान चलाया गया था।





