ब्रेकिंग
Supreme Court Ruling: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला— बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल करना है मौलिक अधिकार Kota Medical College News: कोटा में प्रसूता की संदिग्ध मौत पर हंगामा, सीजेरियन डिलीवरी और इंजेक्शन ल... Banda Road Accident News: उत्तर प्रदेश के बांदा में तेज रफ्तार बाइक ने महिला को मारी टक्कर, इलाज के ... Yogi Adityanath on Navratri 2026: सीएम योगी ने की मां कालरात्रि की आराधना, कहा— '2017 से पहले प्रदेश... RG Kar Medical College Case: आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को मिली जमानत, समिक भट्टाचार्य का ... Pregnancy Scan Guide: प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड क्यों जरूरी है और डॉक्टर एमआरआई (MRI) कराने से क्य... Greater Noida Mystery: ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में एक ही परिवार के 5 लोगों की संदिग्ध मौत, फूड पॉइजन... Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मौत की सजा पाने वाली मुस्कान अब जाएगी हाईकोर्ट, जेल प्रशासन से मा... Lucknow Shiva Sharma Murder Case: करोड़पति कारोबारी हत्याकांड के 9 दिन बाद भी पुलिस की गिरफ्त से दूर... CJP Founder Abhijit Dipke Bail: कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके को कोर्ट से मिली जमानत, 50...
विदेश

चीन ने अपने हताहतों के बारे में जानकारी देने से क्यों काट रही कन्नी, जानें- क्या कहता है चीनी मीडिया

बीजिंग। पूर्वी लद्दाख की गलवन घाटी में चीनी सेना के हमले में 20 सैनिकों के शहीद होने की जानकारी जहां भारत ने मंगलवार को ही दे दी थी वहीं चीन अपने हताहत सैनिकों की संख्या बताने से अब तक कन्नी काट रहा है। अपुष्ट सूत्रों से जरूर 43 चीनी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। चीन के इस रवैये से अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसके सैनिक इतनी बड़ी संख्या में मारे गए कि शर्मिदगी के कारण वो मुंह नहीं खोल रहा है। उधर चीन के सरकारी मीडिया ने अपने सैनिकों के मारे जाने की बात तो स्वीकार की लेकिन संख्या के बारे में उसने भी कोई जानकारी नहीं दी।

चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में गलवन घाटी में मारे गए चीनी सैनिकों के बारे में पूछे गए सभी सवालों को टाल दिया। हालांकि चीन के मीडिया ने कहा कि सोमवार की रात गलवन में हुए खूनी संघर्ष में किसी के जीतने या हारने की बात को हम प्रचारित नहीं करना चाहते। हमारा मकसद है कि दोनों पक्षों में तनाव बढ़ने से टाला गए

चाइना डेली ने लिखा- हताहत सैनिकों की संख्या ने बताने का उद्देश्य

चाइना डेली ने बुधवार के अपने संपादकीय लेख में लिखा कि चीन ने अपने हताहत सैनिकों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया है। इसके पीछे उद्देश्य यही कि किसी पक्ष को विजेता या पराजित के रूप में नहीं दिखाना है। साथ ही तनाव बढ़ने से रोकना है। हालांकि दोनों पक्षों में सैनिकों के हताहत होने से इस बात की चिंता बढ़ गई है कि हालात कहीं काबू से बाहर न हो जाएं। अचरज की बात है कि भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले सरकारी मुख पत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी अपने संपादकीय लेख में लगभग यही बात दोहराई है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा- चीन क्यों नहीं बताया हताहतों की संख्या

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि यह ध्यान देने की बात है कि चीन ने हताहतों की संख्या नहीं बताई। इसके पीछे मकसद यह है कि इस संघर्ष को लेकर लोग किसी तरह की तुलना न करें जिससे बेवजह का तनाव बढ़े। अखबार ने लिखा कि सीमा के मसले पर देश के लोगों को चीन सरकार और चीनी सेना पर भरोसा करना चाहिए। ये दोनों चीन की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता से रक्षा कर रहे हैं।

चइना डेली ने कहा दोनों पक्षों में कोई सीमा युद्ध नहीं चाहता

चाइना डेली ने लिखा कि यह सही है कि संघर्ष में दोनों पक्षों की ओर से एक भी गोली नहीं चली। यह अभी संभव है कि क्षतिपूर्ति के तौर पर दोनों पक्ष क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए मिलकर प्रयास करें। बातचीत के लिए बेहतर माहौल बनाने और सैनिकों की हानि बचाने के लिए सुनिश्चित करना होगा कि सेनाओं के बीच फिर किसी तरह का टकराव की नौबत न आए। दोनों पक्षों में कोई भी सीमा पर युद्ध नहीं चाहता।

ग्लोबल टाइम्स का दावा दोनों पक्षों के सैनिक हताहत

उधर ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि गलवन में हुए संघर्ष में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए हैं। अगर हालात इसी तरह तनावपूर्ण बने रहे तो कभी भी नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। वैसे हमने देखा कि दोनों देशों की सैन्य नेतृत्व ने इस घटना के बाद संयम का परिचय दिया। जाहिर है कि दोनों पक्ष इस समस्या का शांतिपूर्ण तरीके से हल चाहते हैं।

चीनी भाषा की मीडिया में चीनी सेना का गुणगान

दोनों अखबारों ने दावा किया कि अमेरिका भारत के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा रहा है। अमेरिका की शह पर प्रशांत क्षेत्र में चीन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में भारत भी शामिल हो रहा है। चीनी भाषा की मीडिया में जहां चीनी सेना का गुणगान हो रहा है वहीं सरकारी मीडिया में इस मामले की एक जैसी कवरेज करते हुए खूनी संघर्ष के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया है।

सरकारी टीवी पर शाम सात बजे खबरों के कार्यक्रम शिनवेन लियांबो में झड़प की खबर का कोई जिक्र नहीं किया गया। हालांकि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत की जानकारी जरूर दी गई।

Related Articles

Back to top button