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वैज्ञानिकों ने सुझाई कोरोना इलाज की राह, पढ़ें शोधकर्ताओं ने क्या कहा

वॉशिंगटन। वैज्ञानिकों ने गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीजों में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यून रिस्पांस) का आकलन करके छह मोलिक्यूल (अणुओं) के अनोखे पैटर्न की पहचान की है। उनका कहना है कि अगर इन पर हमला किया जाए तो कोरोना मरीज ठीक हो सकते हैं। ब्रिटेन के लॉसन स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने लंदन हेल्थ साइंसेज सेंटर (एलएचएससी) में भर्ती गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीजों के रक्त के नमूनों का आकलन किया।

आकलन के आधार पर वैज्ञानिकों ने आइसीयू में भर्ती कोरोना मरीजों के खून में छह मॉलिक्यूल मिले, जो मरीजों को उन लोगों से अलग करते हैं, जिन्हें यह बीमारी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कुछ कोरोना मरीजों का इम्यून सिस्टम वायरस के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया देता है और साइटोकिन स्टार्म (एक गंभीर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जिसमें शरीर बहुत जल्दी खून में बहुत अधिक मात्रा में साइटोकिन छोड़ता है) पैदा करता है, इसमें शरीर के प्राकृतिक सूजन संबंधी अणु का बढ़ा हुआ स्तर स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।

अध्ययन के सह लेखक लॉसन और वेस्टर्न शूलिक स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री के डगलस फ्रेजर ने कहा, ‘चिकित्सक इस अत्यधिक सूजन को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता है कि आखिर हमला कहां किया जाए।’ फ्रेजर ने कहा, ‘हमारे अध्ययन से एक बात स्पष्ट हो गई कि इलाज के दौरान डॉक्टरों को दवाओं का प्रयोग कहां करना है।

शोध में वैज्ञानिकों ने 30 मरीजों का आकलन किया, जिसमें 10 कोरोना मरीज, 10 अन्य संक्रमण के मरीज और 10 स्वस्थ प्रतिभागी शामिल थे। रक्त के नमूनों की जांच में पाया गया कि आइसीयू में भर्ती कोरोना मरीजों में छह उत्तेजक अणु ऐसे थे जिनका स्तर विशेष ढंग से बढ़ा हुआ था। यह अध्ययन ‘क्रिटिकल केयर एक्सप्लोरेशन पत्रिका’ में प्रकाशित हुआ है।

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