ब्रेकिंग
रायसेन में अंधे कत्ल का पर्दाफाश: पत्नी से बातचीत के शक में दो भाइयों ने फरसे से काटकर की हत्या, दोन... जबलपुर में तालाखेड़ा तालाब के पास से 80 हजार की 4 भैंसें चोरी: पशुपालकों में हड़कंप, सिहोरा पुलिस को... उज्जैन में गूंजेगी बी प्राक की आवाज: श्रावण कला उत्सव में देंगे भजनों की प्रस्तुति, मंदिर व्यवस्थाओं... धार में दर्दनाक हादसा: उज्जैन महाकाल दर्शन कर लौट रहे वडोदरा के 6 युवकों की मौत, रॉन्ग साइड से आए ट्... हरिद्वार कांवड़ मेले में टूटा रिकॉर्ड: 3.19 करोड़ पार पहुंची शिव भक्तों की संख्या, डाक कांवड़ियों का... दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने रचा इतिहास, न्यूयॉर्क, पेरिस और हांगकांग को पछाड़ विश्व में बनाई अपनी धाक उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया पर मचा घमासान: रुड़की में 15 हजार वोट काटने का आरोप, 20.27 लाख मतदाताओं ... वैभव सूर्यवंशी की पावर-हीटिंग के दीवाने हुए ब्रेट ली: उम्र पर सवाल उठाने वालों को दिया मुंहतोड़ जवाब 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' ने रचा इतिहास: भारत में 10 दिन में 380 करोड़ पार, वर्ल्डवाइड की 14,500... चीन में 'टाइफून डॉल्फिन' का महाविनाशकारी रूप: शंघाई से 1,300 से ज्यादा उड़ानें रद्द, 4 लाख लोग सुरक्...
देश

पानी की जगह देते थे मूत्र और उखाड़ लेते थे नाखून, मानसिक यातानाओं का भी चला था दौर

जालौन। ‘उफ, याद मत दिलाइए, ब्रिटिश सरकार से ज्यादा जुल्म सहे हैं आपातकाल में। पानी मांगों तो जबरन मूत्र पिलाया जाता था। यातना इतनी कि नाखून तक उखाड़ लिए जाते थे। पेड़ से उलटा लटकाकर पीटा जाता था। अंगुलियों में पिन चुभो दी जाती थी। संघ के वरिष्ठ नेताओं की जानकारी पाने के लिए कड़ी यातना दी जाती थी।’ भले ही यह दर्द 44 साल पुराना हो, लेकिन इसकी सिहरन अभी भी सेवानिवृत अध्यापक राजाराम व्यास के जेहन में ताजा है। उरई के राजेंद्र नगर में रहने वाले राजाराम आपातकाल के दौरान 20 महीने से ज्यादा जेल में रहे थे।

सात जून 1975 को देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। 26 जून 1975 को देश के किसी भी अखबार ने संपादकीय नहीं लिखा। फिर देशभर में उत्पीड़न शुरू हो गया। झूठे मुकदमे लिख मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) और डीआइआर (डिफेंस ऑफ इंडिया रूल) जैसे काले कानूनों में जेल में बंद किया जाने लगा। संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। राजाराम बताते हैं कि चार जुलाई 1975 को घर को भारी फोर्स ने घेर लिया था। मानो किसी डकैत या खूनी को पकड़ने आई हो। आपातकाल की घोषणा के समय मैं गांव में था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हमीरपुर में तत्कालीन जिला प्रचारक ओमप्रकाश तिवारी का संदेश मिला तो वहीं जाकर संघ कार्य में जुट गया। चार जुलाई को उन्हें यमुना नदी पार कराकर किसी अज्ञात जगह भेज दिया और मैं अपने घर आ गया। उसी रात गिरफ्तारी की गई। मैं हमीरपुर में गिरफ्तार होने वाला पहला शख्स था। अगले दिन डीआइआर कानून लगाकर जेल में बंद कर दिया गया। मेरे साथ ओंकार नाथ दुबे एडवोकेट, जयकरन सिंह, इंद्र बहादुर सिंह भी बंद किए गए।

नहीं था कोई इंतजाम

राजाराम कहते हैं कि प्रशासन को भी इतनी संख्या में गिरफ्तारी का अंदाजा नहीं था। जेल में कपड़े, रहने-खाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। छोटी सी बैरक में डेढ़ सौ लोग बंद थे। लेटना तो दूर बैठने में भी दिक्कत थी। व्यवस्था के लिए अनशन पर बैठे तो जेल प्रशासन ने तीन दिन बाद कहा कि मिलने के लिए लोग आए हैं। गेट पर पहुंचे तो वहां पहले से खड़े पुलिस वाहन में जबरन बैठा दिया गया। कोई नहीं जानता था, कहां जा रहे हैं। सुबह पहुंचे तो सामने का आगरा जेल का गेट था।

बाबा जय गुरुदेव के पैरों में पड़ी थीं बेड़ियां

राजाराम व्यास के मुताबिक आपातकाल का विरोध करने के कारण आगरा जेल में बाबा जय गुरुदेव भी बंदी थे। उनके पैरों में लोहे की बेड़ियां थी। उनके भक्त जेल की परिक्रमा के बाद जो फल आदि दे जाते थे, वहीं हम लोग खाते थे।

रिवॉल्वर लगा पूछा पता, फिर लटका दिया उलटा

राजाराम बताते हैं कि तानाशाही इतनी थी कि हर वह यातना जो सोच भी नहीं सकते, दी गई। संघ के सतीश शर्मा को सिर पर रिवॉल्वर लगा दी गई। ओमप्रकाश तिवारी का पता नहीं बताने पर पेड़ से उलटा लटकाकर पीटा गया। मुझे 19 नवंबर 1975 को फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया। वहां तीन माह तक तनहाई बैरक में रखा गया। जेल भेजने से पहले भी पुलिस ने बहुत प्रताड़ित किया। हमीरपुर के रामकेश विश्वकर्मा व विश्वंभर शुक्ला को थाने में उस समय दारोगा प्रभुदयाल ने जो यातनाएं दीं, उसके सामने अंग्रेज कुछ नहीं थे।

मानसिक यातानाओं का भी चला था दौर

राजाराम बताते हैं कि हम लोगों को शारीरिक ही बल्कि मानसिक यातनाएं भी दी गईं। परिजनों के भेजे पत्र पहले जेलर पढ़ते थे। फिर हमें देकर वापस ले लेते थे। मिलाई संभव नहीं थी। लंबी सांस लेकर राजाराम बोलते हैं कि 23 मार्च 1977 को आए चुनाव परिणाम ने तानाशाही के बादल छांट दिए और 25 मार्च 1977 को रिहा किए गए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button