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चौबीस घंटे चला रहे मुक्तांजलि वाहन

रायपुर। प्रदेश में कोरोना संक्रमण अपने चरम पर है। रायपुर में 17 मई की सुबह छह बजे तक लॉकडाउन है। लोग अपने घरों में हैं। बिना काम के कोई अपने घर से बाहर नहीं निकल रहा है। बिना काम के घर से बाहर निकलने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है। जिससे कोरोना की चेन को तोड़ी जा सके। वर्तमान में आंबेडकर अस्पताल में मुक्ताजंलि चालक किसी कोरोना योद्धा से कम नहीं है। वह अपनी व अपने परिवार की परवाह किए बगैर दिन रात ऐसे समय में अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं।

प्रदेश के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में मुक्तांजलि वाहन चलाने वाले समशेर खान ने नईदुनिया को बताया कि उनकी शिक्षा आठवीं तक हुई है। मूलत: वह रायपुर जिले के मंदिर हसौद थाना अंतर्गत कुटेरी गांव रहने वाले हैं। पहले वह सब्जी वाहन चलाने का काम करते थे। लेकिन अचानक वह सब्जी गाड़ी चलाना बंद कर दिया। कुछ दिनों तक बेरोजगार रहे।

इसके बाद मुक्तांजलि चलाने के लिए चालक की जरूरत थी। इसलिए पिछले कोरोना काल से मुक्तांजलि चला रहा हूं। उन्होंने बताया कि वह 24 घंटे ड्यूटी करके घर जाते हैं। वर्तमान में एक दिन में तीन से चार शव श्मशान घाट ले जाते हैं। शव ले जाने के पहले पीपीई किट पहनते हैं, और पूरी गाड़ी को सैनिटाइजर कर आधे घंटे तक बंद कर देते हैं। उसके बाद गाड़ी के अंदर बैठते हैं।

शव को श्मशान घाट पर उतारने के बाद वापस आने पर पूरे शरीर को सैनिटाइज करते हैं। पीपीई किट उतार उसके डिस्पोज करने के लिए डाल देते हैं। दूसरा शव लेने जाने पहले फिर नई पीपीई किट पहनते हैं, उसके बाद शव को लेकर जाते हैं। उन्होंने बताया कि घर जाने के बाद सीधे बाथरूम में जाते हैं। कपड़े गर्म पानी में डाल देते हैं। नहाने के बाद घर के अंदर प्रवेश करते हैं।

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