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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लव जिहाद सहित आठ विधेयकों को दी मंजूरी

अहमदाबाद। Gujarat: गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने राज्य सरकार के लव जिहाद संबंधी गुजरात फ्रीडम व रिलीजन संशोधन विधेयक सहित आठ विधायकों पर मंजूरी की मुहर लगा दी है। राज्यपाल देवव्रत की ओर से गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन कानून को मंजूरी देने के बाद राज्य में अब अंतर धार्मिक विवाह मुश्किल हो जाएगा। कानून के तहत ऐसा विवाह कराने वाले व लड़की को बहला-फुसलाकर शादी रचाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। हिंदू युवती से कोई मुस्लिम युवक प्रेम विवाह तो कर सकेगा, लेकिन उसका धर्म परिवर्तन कराना मुश्किल हो जाएगा। धर्म परिवर्तन कराने पर उसके मां, बाप, भाई, बहन या किसी भी रिश्तेदार की शिकायत पर पुलिस शादी करने वाले लड़के, शादी कराने वाले मौलवी व उसमें भागीदार व मददगार लोगों की भी धर पकड़ कर सकेगी। इस कानून के तहत ऐसी गैरकानूनी शादी में मददगार व मौलवी को भी सख्त सजा का प्रावधान है।

कानून व संसदीय मामलों के मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासामा ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले विधानसभा सत्र में यह सभी आठ विधेयक पेश किए थे, जिसमें क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट, निजी विश्वविद्यालय, अशांत धारा, महामारी एक्ट के संबंध में भी संशोधित विधेयक पेश किए गए थे। अशांत धारा कानून के तहत किसी भी क्षेत्र में अल्प संख्या में रहने वाले समुदाय को प्रताड़ित कर अब उसकी संपत्ति नहीं हड़पी जा सकेगी या ना खरीदी जा सकेगी। संपत्ति को खरीदने वाले को जिला कलेक्टर से परमिशन लेनी पड़ेगी। महामारी सुधार कानून के तहत राज्य के निजी अस्पतालों को महामारी संबंधी बीमारियों के उपचार की जानकारी देनी होगी। साथ ही, ऐसे मरीजों के लिए बेड भी आरक्षित रखने होंगे। राज्य सरकार इन अस्पतालों की जांच व नियमन भी कर सकेगी। सरकार ने फौजदारी कानून की प्रक्रिया में भी सुधार करते हुए जिला मजिस्ट्रेट व पुलिस आयुक्तों को अतिरिक्त शक्तियां दी है, ताकि शहरों में किसी तरह का हुल्लड़ करके या भीड़ जमा करके प्रशासन व पुलिस के कानून और शांति व्यवस्था के प्रयास बाधा नहीं पहुंचा सके

गृह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा ने विधानसभा में गुजरात फ्रीडम ऑफ रिलीजन विधेयक पेश करते हुए कहा कि कई हिंदू लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा कर उनको लव जिहाद का शिकार बनाया जाता है। धर्म परिवर्तन कराकर उनकी जिंदगी नर्क समान बना दी जाती है, लेकिन इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद कोई भी विधर्मी लड़कियों को प्रताड़ित या शोषण नहीं कर पाएंगे।

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